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(रजत चौहान) हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में गीतामृत की विशेष कक्षा का आयोजन हुआ। कक्षा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि युग-युग तक जग याद करें, तुम ऐसे कर्म करो, कर्म में ऐसे मर्म भरो कि जिससे आने वाली कई पीढ़ियाँ संजो कर रख सके। जिस तरह स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सुभाषचन्द्र बोस, पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अनेक लोगों को जीवन संवारने से लेकर व उन्हें नवजीवन प्रदान किया। शरीर छोड़ने के कई वर्षों के बाद भी उन्हें आज भी याद कर प्रेरणा प्राप्त करते हैं। निरंतर श्रेष्ठ कर्म करते रहने से योगी बन सकते हैं। गीता में भगवान श्रीकृष्ण भी श्रेष्ठ कर्म करते रहने के लिए प्रेरित करते हैं। युवा उत्प्रेरक डॉ. पण्ड्या ने गीता के विभिन्न श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि तू संयत कर्म कर, क्योंकि अकर्म की अपेक्षा कर्म श्रेष्ठ होता है और कर्म बिना किये शारीरिक जीवन का निर्वाह भी मुश्किल होगा। इस अवसर पर युवा चेतना के उद्घोषक कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने विद्यार्थियों को निरंतर श्रेष्ठ कर्म करते हुए सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर युगगायकों ने ‘युग-युग तक जग याद करें...’ प्रज्ञागीत प्रस्तुत किया। इस दौरान देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण, छात्र छात्राएं एवं शान्ति कुंज कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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