(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा थमने का नाम नहीं ले रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के दावे यहां खोखले नजर आते हैं। गैर जिम्मेदार अधिकारी और सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के कारण लगातार शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। जिसके कारण विद्यालयों में बच्चों की संख्या भी लगातार कम हो रही है। अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए प्राइवेट विद्यालयों की ओर कूच कर रहे हैं। जिससे बच्चों का जीवन सर संवर सके। अब सवाल यह उठता है कि सरकार विभागीय अधिकारी कर्मचारियों से लेकर शिक्षकों आदि पर हर महीने बड़ा बजट खर्च करती है। हर तरह की सुविधाएं उच्चधिकारियों को मुहैया कराई जाती है तो वही शिक्षकों पर भी तनख्वाह के रूप में लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। फिर भी सरकारी स्कूलों में बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। सरकार द्वारा बच्चों का भविष्य संवारने के लिए हर गांव देहात इलाकों में सरकारी विद्यालय खोले गए हैं। उसमें शिक्षकों की तैनाती भी की गई है। लेकिन प्रदेश के कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं जहां शिक्षक पूरी तरह से नदारद रहते हैं और बच्चे विद्यालय में खेलते हुये अपना समय बिताते हैं। सरकारी शिक्षा को लेकर विभाग कितना संजीदा है। इसका अंदाजा आप रुड़की ब्लॉक रतनपुर गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय को देखकर आसानी से लगा सकते हैं। गौरतलब है कि यहां सरकारी विद्यालय इस मकसद से खोला गया था कि रतनपुर गांव के ग्रामीणो के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान हो सके। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब इस विद्यालय में नौनिहालों का भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है। विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने के लिए तीन शिक्षक और एक प्रधानाचार्य की तैनाती की गई। अब इनमें से दो शिक्षकों की बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगी है और प्रधानाचार्य छुट्टी पर चल रही है। और मौजूदा एक शिक्षक विद्यालय में पंजीकृत 99वें बच्चों को अकेले ही शिक्षा दे रहे है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में पढ़ने वाले देश के भविष्य नौनिहालों का जीवन किस तरह बर्बाद किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में बरती जा रही अनियमिताओं के कारण जहां बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। वहीं शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकारी विद्यालय की इस हालत का ही नतीजा है कि अभिभावक अपने बच्चों का सरकारी विद्यालयो में नामांकन नहीं करा रहे हैं। बच्चों का भविष्य खराब न हो, इसके लिए अभिभावक उनका नामांकन प्राईवेट विद्यालयों में करा रहे हैं। जब शिक्षक स्कूलों में नहीं होंगे, तो बच्चे क्या शिक्षा प्राप्त करेंगे। और अभिभावकों का अपने बच्चो के प्रति उज्जवल भविष्य का सपना किस दिशा में जाएगा। यह आप पूर्ण रूप से अंदाजा लगा सकते हैं। वही राजकीय प्राथमिक विद्यालय में तैनात उपस्थित शिक्षक ने बताया कि विद्यालय में तैनात दो शिक्षकों की बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगाई गई है और प्रधानाचार्य छुट्टी पर है। उन्होंने बताया कि उप शिक्षा अधिकारी रुड़की को लिखित सूचना देकर अवगत कराया गया है कि बच्चों के हित की दृष्टि से बोर्ड परीक्षा में एक ही शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाए। वही रतनपुर गांव के निवासी नफीस अहमद ने बताया कि गांव के सरकारी स्कूल में तैनात प्रधानाचार्य लगातार छुट्टी पर रहती है। छुट्टी खत्म होने के बाद भी महीनेे में एक, दो बार ही विद्यालय में उपस्थित होती हैं। जिससे बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार विभाग को प्रधानाचार्य की लापरवाही को लिखित रूप में अवगत भी कराया गया। लेकिन कोई भी ठोस कार्रवाई प्रधानाचार्य पर नहीं की गई है। जिससे छोटे-छोटे बच्चों का जीवन अंधकार की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानाचार्य को लगातार किस आधार पर छुट्टी दर छुट्टी दी जा रही है। प्रधानाचार्य को जब घर रहने का ही शौक है तो क्यों नहीं अन्य प्रधानाचार्य को रतनपुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय में तैनात कर दिया जाए।
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हरिद्वार की गूंज: रतनपुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत 99वें बच्चों पर एक ही शिक्षक हैं तैनात अधिकारियों की घोर लापरवाही आई सामने
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