हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती उपासना करने का विशेष दिन है। महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती विवाह बंधन में बंधे थे। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। साधक को भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। उक्त उद्गार महाशिवरात्रि पर रात्रि पर्यन्त चले महारूद्राभिषेक को संपन्न करने के पश्चात श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर म. म. स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करें। भगवान शिव दयालु व कृपालु देव हैं। शिवलिंग पर गंगा जल से अभिषेक करने मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्त की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि पर्व जीवन के कष्टों को दूर करने तथा अभिष्ट का प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। प्रत्येक भक्त को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। महाशिवरात्रि भगवान शिव व माता पार्वती की आराधना का पर्व है। भगवान शिव को अभिषेक अत्यन्त प्रिय है। गंगा जल, दूध, दही, शहद, घी, विल्व पत्र आदि से भगवान का रूद्राभिषेक करने से वे अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव की लीला अपरंपार है। जिसे उनके सिवाय कोई नहीं जान सकता। उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण तथा राज्य की सुख समृद्धि के लिए प्रत्येक शिवरात्रि के अवसर पर श्री दक्षिण काली मंदिर में महारूद्राभिषेक संपन्न किया जाता है। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि श्री दक्षिण काली मंदिर में मां काली के साथ भगवान शिव भी साक्षात रूप से विराजमान हैं। भगवान शिव व मां काली की आराधना करने से साधक के सभी संकट दूर होते हैं। परिवारों में सुख समृद्धि का वास होता है। श्रीमहंत साधनानंद, म.म.स्वामी प्रबोधानंद गिरी, स्वामी सत्यव्रतानंद, स्वामी शिवानन्द, महंत निर्मलदास, आचार्य पवनदत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पाण्डे, विवेकानंद ब्रह्मचारी, अंकुश शुक्ला, अनुराग वाजपेयी, अनुज दुबे, जतिन हांडा, बाल मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, सागर ओझा, पार्षद अनिरूद्ध भाटी आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना कर म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।



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