हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। हम उस समाज मे अपना जीवन यापन कर रहे हैं जहां यातायात के नियमो का पालन करना हमारी शिक्षा में न होकर मजबरी में हो गया है। किसी भी चौराहे, तिराहे पर रेड सिग्नल लाइट जम्प करने से पहले वाहन चालक ये सुनिश्चित करता हैं कि आस पास या जहां तक निगाह जाती हैं वहाँ कोई पुलिस या सीपीयू तो नही है। उसके अनुसार ही वह रेड लाइट जम्प करेगा या ग्रीन लाइट होने तक प्रतीक्षा करेगा। ऐसे वाहन चालक कुछ पल को बचाने के चक्कर मे कई बार अपना जीवन नही बचा पाते, जिसके कारण वह अपने परिवार को रोता बिलखता छोड़ कर हमेशा के लिए निकल जाता है। ज्वालापुर में अवधुत मण्डल ( शंकर आश्रम) तिराहा जो कि रानीपुर मोड़ के बाद दूसरा सबसे बड़ा व्यस्त चौक हैं। हालाकि यहाँ हरिद्वार प्रशासन द्वारा सिग्नल लाइट की व्यवस्था की हुई। मगर वाहन चालक देखता है कि कोई बिना हेलमेट वाला तो कोई तीन सवारी बैठाकर रेड लाइट जम्प कर रहा है तो हम ही रेड लाइट के चक्कर मे क्यो खड़े हो? इस कारण वाहन दुर्घटना और पैदल चलने वाले घायल होने का अंदेशा बना रहता है। उससे भी बड़ा अनुशासन हीनता तब देखी जाती हैं जब कई कई ऑटो वाले बिना किसी पुलिस वाले के भय से पीली पट्टी के अंदर खड़े होकर सवारी के आने की प्रतीक्षा करते देखे जाते हैं। भले ही चाहे उनके सड़क के बीच मे खड़े होने से अन्ये वाहन चालकों को असुविधा हो। इस विषय मे ट्रैफिक एस पी आयुष अग्रवाल ने हरिद्वार की गूंज से आवश्यक ठोस कदम उठाने की बात कही हैं। अब देखना यह हैं कि उनका ये आदेश स्थानीय पुलिस कब तक लागू करती हैं।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours