हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। शिक्षा क्या है, शिक्षा एक ऐसा रास्ते है, जो इंसान को अंधकार से रोशनी की तरफ ले जाता है, शिक्षा वो है, जो इंसानियत को बुराई से अच्छाई के रास्ते पर लेकर जाती है, शिक्षा जिन्दगी जीने का एक आधार है, शिक्षा समाज मे जिंदगी जीने का माध्यम है, शिक्षा से ही समाज अच्छाई और सच्चाई की लडाई लड सकता है, शिक्षा से ही तहजीब, और सभ्यता संवर सकती है, शिक्षा से ही इंसान बडे छोटे का सम्मान करना सीख सकता है, शिक्षा से ही इंसान को दुनिया मे जीने का सही ज्ञान होता है, शिक्षा से ही इंसान जिन्दगी मे परिश्रमी बन सकता है, शिक्षा हासिल करना भी एक कला है, शिक्षा ही रोजगार का माध्यम है, शिक्षा से इंसान नये आयाम तलाश सकता है, शिक्षित इंसान एक आयना है, शिक्षा इंसान को मजबूत बनाती है, शिक्षा से ही इंसान समाज को एकजुट कर सकता है, शिक्षा से ही इंसान भेदभाव समाप्त कर सकता है, शिक्षा से इंसानो के बीच के ऊँच नीच को खत्म किया जा सकता है, शिक्षा से ही अपने बडे और छोटो का सम्मान करने का ज्ञान होता है, शिक्षा इंसान की जिंदगी का एक बडा हिस्सा है, अशिक्षा एक बुरा अध्याय है, शिक्षा से ही इंसान समाज को साफ और स्वच्छ रख सकता है, अशिक्षा के कारण कोई भी इंसान सामाजिक जिन्दगी ठीक प्रकार से नही जी सकता है, 
इसलिए समाज के गरीब बच्चो को शिक्षा दिलाने मे ज्यादा से ज्यादा सहयोग करे, ताकि सभी वर्गो के बच्चे अशिक्षा से बचे, सडको पर भीख मांगते बच्चों को भीख देने से बचे भीख के बदले उनकी शिक्षा का प्रबंधन करने का प्रयास अवश्य करे, आपकी मदद से अगर एक बच्चा भी पढ लिख लिया और  पढ लिख कर देश और समाज के विकास का सहभागी बन गया तो समझ लेना आपका जीवन सफल हो गया, आसपास के स्कूलो मे पढने वाले बच्चो की जानकारियां लें, कि कोई बच्चा ऐसा तो नही है, जिसके अभिभावको ने पैसे की तंगी के कारण अपना बच्चा पढने से रोक लिया हो, पैसो के कारण पढाई बाधित हो गई हो, ये बात मे इसलिए कह रहा हूँ, कि मेरा भी एक छोटा सा स्कूल है, जो ज्वालापुर मे स्थित है, जिसमे लगभग 100 बच्चे पढने आते है, और वो ऐसे परिवारों से है, जिनकी आर्थिक हालत ठीक नही है, इस स्कूल से बहुत से परिवारों ने बच्चे रोक लिये कारण था, पैसा ना होना, तो मैने उनको कहाँ कि आप अपने बच्चे को पढने भेजो, पढाई से ना रोको थोडा प्रयास आप करो थोडा प्रयास हम करेगे, लेकिन केवल मेरे द्वारा ही प्रयास किये गये, समाज के बहुत लोगो को मैने कहाँ कि मेरे स्कूल मे कुछ बच्चे गरीब है, और थोडा थोडा उनकी शिक्षा मे सहयोग करे, ताकि उनकी पढाई ना बाधित हो, लेकिन किसी ने भी दिलचस्पी नही दिखाई है, बस खुदा के ऊपर प्रयास जारी है, जो खुदा करेगा, वो हो जायेगा, लेकिन दिल को एक सकून है, कि मै अपनी तरफ से पूरे प्रयास करता हूँ, और करता रहूँगा, तो मेरे यह लिखने का मकसद केवल यह था, कि समाज को एक सही दिशा प्रदान करने के लिए तथा दशा सुधारने के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है, इसलिए गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए सहयोग करे, ताकि उनका तथा समाज और देश का भविष्य संवर सके, गरीब बच्चो की शिक्षा के ऐसे स्कूलों से सम्पर्क करे, जहाँ गरीब परिवारों के बच्चे पढ रहे है, उक्त स्कूल का भी ध्यान रखे।
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