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(जावेद राणा) गागलहेड़ी। सरकार भले ही सरकारी स्कूल के बच्चों को कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधा देने का दम भर रही हो। मगर, इनमें से कई स्कूलों के शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनसे साफ-सफाई करवाते हैं। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में किस तरह शिक्षा का बंटाधार किया जा रहा है। हरोडा अहतमाल गांव के इस स्कूल के बच्चे क्लास में पढ़ाई की शुरूआत करने से पहले खुद झाड़ू लगाकर साफ-सफाई करते हैं और ये नजारा अक्सर ही देखने को मिलता है।
....ऐसे कैसे पढ़ेंगे बच्चे...
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की क्या हालत है इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां बच्चों के हाथों में कॉपी-किताब की जगह झाड़ू नजर आ रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने भले ही स्कूलों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी वहां पढ़ा रहे टीचरों को दी हो। लेकिन कुछ टीचर ऐसे भी हैं
जिन्होंने छात्रों के हाथों में झाड़ू थमा दी। ऐसा ही एक मामला ब्लॉक पुवारका के ग्राम हरोडा अहतमाल के प्राथमिक विद्यालय से सामने आया है। सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो उनके हाथ में पेंसिल और कॉपी-किताब की जगह झाड़ू थमा दी जाती है और छात्रों को ही सफाई कर्मी बना दिया जाता है। यह पहला मामला नही है कि जब इस स्कूल में बच्चे झाड़ू लगाते मिले हो, लगातार बच्चो से ही इस स्कूल में झाड़ू लगवाई जाती है।
....बच्चों के हाथ में झाड़ू...
छात्रों के साथ किए जा रहे इस तरह के व्यवहार को देखकर जब हम स्कूल के अंदर पहुँचे तो टीचर हड़बड़ा गए और बच्चों को झाड़ू रखकर क्लास में बैठने के लिए कहने लगे। जब हमने स्कूल के टीचर से पूछा कि आप बच्चों से झाड़ू क्यों लगवा रहे हैं तो वह मानने को तैयार ही नहीं थीं। वह सफाई देने लगीं कि स्कूल में कोई सफाईकर्मी नहीं आता है। खैर वजह जो भी हो लेकिन एक तरफ सरकार सर्व शिक्षा अभियान में करोड़ों रुपए खर्च कर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। तो वहीं दूसरी तरफ बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी लेने वाले की इसकी जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं और बच्चों के हाथ में किताबों की जगह झाड़ू थमा रहे हैं।
....नही होती कार्रवाई...
हरोडा अहतमाल के प्राथमिक विद्यालय में नन्हे बच्चो से झाड़ू लगवाने का यह पहला मामला नही है, इस स्कूल में लगातार बच्चो से ही झाड़ू लगवाई जाती है, लगातर इस स्कूल की समाचार भी छापी जा रही है, लेकिन शिक्षा अधिकारी इस मामले को जरा भी संज्ञान में नही ले रहे है। जिससे स्कूल के टीचरों के भी हौसले बुलंद हो चुके है।




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