हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। "जिक्रे हुसैन आया तो आँखे छलक पड़ी, पानी को कितना प्यार है आज भी हुसैन से" जी हाँ, सितम्बर महीने की 10 तारीख यानी आशूरा के दिन दुनियाभर के मुसलमान इस्लाम धर्म के आखरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लाहु वआलही वसल्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिये निकालकर उन्हें याद करते हैं। इसलिए दिन जगह-जगह ताजिए निकाल कर फ़ातेहा और तिलावते कुरान किया जाता है। कटारपुर के अलावा अन्य गांवों जैसे धनपुरा, सुल्तानपुर आदि में भी आज ताजिए निकाले गए हैं। गौरतलब है कि इस्लामिक नए साल की 10 तारीख को नवासा ए रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ इंसाफ को जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे लिहाजा मोहर्रम इमाम हुसैन की शहादत का दिन है। इसलिए मोहर्रम उनकी याद में निकाले जाते हैं। इस बार मुस्लिम युवकों ने इस अवसर पर कटारपुर गाँव के बस स्टॉप पर पानी की छबील 'सरबत स्टॉल' लगाए गए। आते जाते प्यासे राहगीरों को नवयुवकों ने पानी पिलाकर राहगीरो की खूब वाह वाह लुटी। इस मौके पर मोहम्मद इनाम, नदीम अंसारी, गुलजार, सानू, शौकीन, उस्मान के अलावा भारी संख्या में उनके साथियों ने इस नेक काम मे उनका साथ दिया।



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