हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के ग्राम जसवावाला चकबंदी विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचारी, जालसाजी कर ग्राम पंचायत भूमि को खुर्द बुर्द करने व पूर्व प्रधान को 12 बीघा हवाई चक आवंटित कराने की खबरे समाचार पत्र और सोशल मीडिया पर छाई हुई है, जिसके पश्चात जसवावाला चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार होने की आशंका जताई जा रही है, इससे पूर्व में हरिद्वार जनपद के ग्राम फिरोजपुर बेलडा में चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार की आंशका के तहत स्थानीय लोगो के माननीय उच्च न्यायालय में जाने के बाद उच्च न्यायालय के आदेशानुसार एक एसआईटी टीम का गठन किया गया, जिसमे एसआईटी की जांंच में भ्रष्टाचार, जालसाजी का मामला प्रकाश मे आया तथा कुल 24 सरकारी और गैर सरकारी लोगो पर मुकदमे पंजीकृत हुए थे, ग्राम फिरोजपुर बेलडा चकबंदी विभाग जैसा मामला जसवावाला चकबंदी विभाग में होता प्रतीत दे रहा है, जिसमे चकबंदी विभाग के कर्मचारियों द्वारा कुछ चहेतो के साथ मिलकर सरकारी सम्पत्ति को खुर्द बुर्द करने का प्रयास किया जा रहे है, और चकबंदी में जमीन गांंव के पात्र लोगो को नही दी जा रही है, यह विचार जनपद हरिद्वार के प्रसिद्ध सूचना अधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार ने पत्रकारों के सामने रखे हैं उन्होंने जसवावाला चकबंदी में भ्रष्टाचारी और जालसाजी के मकड़जाल को गंभीरता से लेते हुए विभाग पर लगे आरोपो की माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड शासन से चकबंदी प्रकरण की एसआईटी से जांंच कराने की मांग के लिए पत्र लिखा है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी जसवावाला प्रकरण में सामने आ सके तथा सरकारी सम्पत्ति को खुर्द बुर्द होने से बचाया जा सके और जिन लोगो को आवश्यकता है, जो गरीब किसान है, उन तक उनका हक पहुँच सके, इसके साथ ही अब्दुल सत्तार ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्तर से एसआईटी जांंच के आदेश नही दिये जाते है, तो इस प्रकरण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाने पर सोच विचार किया जायेगा, यह सभी बाते हरिद्वार की गूंज समाचार पत्र से अब्दुल सत्तार ने कही हैै, आपको बताते चले कि पेशे से अध्यापक अब्दुल सत्तार एक आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जनपद हरिद्वार में विख्यात है, तथा सामाज हित के मुद्दो पर सरकारी विभाग पर पैनी नजर रखते है, और सामाज के लिए हर सम्भव मदद करने को तैयार रहते है, लेकिन इसी के साथ अब्दुल सत्तार ने अफसोस भी जताया है कि जनपद हरिद्वार के चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचारी, जालसाजी अपनी चरम सीमा पर है, जबकि 24 लोगो के ऊपर मुकदमे पंजीकृत होने के बाद भी कर्मचारियों में कोई भय का माहोल नही है, मुख्यमंत्री को इस पर भी सोच विचार करने की आवश्यकता है।
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