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(निशात कुरैशी) देवबन्द। किराएदार ने दारुल उलूम से फतवा मांगा है की अगर मकान मालिक हम से दस लाख या पाँच लाख रुपरे लेकर अपना मकान हमे किराए पर देता है ओर हमसे 15 हजार रुपये किराए की जगह एक हजार रुपये या 500 रुपये लेता है तो क्या ये शरियत मे जायज है दारुल उलूम देवबंद ने इसको नाजायज बताया है कहा है की अगर मकान मालिक अपना पुरा कियारा ले तो ठीक है नही तो कम किराया लेना आपके पैसो का ब्याज माना जायेगा ओर शरियत मे ब्याज लेना देना नाजायज है दारुल उलूम देवबंद का एक आन लाईन फतवा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है इस फतवे मे दारुल उलूम से एक सवाल पुछा गया है की अगर हमसे मकान मालिक दस लाख या पाँच लाख रुपये लेकर अपना मकान किराए पर देता है ओर हमसे उस मकान का किराया जो 15 हजार रुपये या 10 हजार रुपये महिने की जगह हमसे केवल एक हजार रुपये या पाँच सौ रुपये लेता है तो क्या ये सही है इस पर दारुल उलूम की इफ्ता कमेटी ने सवाल का जवाब देते हुए कहा की ये तो आपके दिये गए रुपये का ब्याज माना जायेगा और ब्याज लेना व देना इस्लाम मे नाजायज है,
देखें वीडियो: मुफ्ती असद कासमी
मुफ्ती असद कासमी ने कहा की दारुल उलूम देवबंद का सोशल मीडिया के अंदर जो फतवा वायरल हो रहा है फतवे के अंदर फतवा मांगने वाले ने दारुल उलूम देवबंद से यह जवाब मांगा है कि मतलब किसी का फ्लैट है और फ्लैट वाले को किसी आदमी ने 10 लाख या 5 लाख उसको दिए बतौर कर्ज के तौर पर होते हैं जो शरीयत की नजर में उसको कर्ज कहा जाता है लेकिन आज कल उसको फिक्स डिपोजिट या दूसरा नाम दिया जाता है तो दारुल उलूम देवबंद दिए कहता है कि कि मसलन उसको पैसा दिया है और उसके बाद में वह रहने के लिए मकान देता है और मकान देने के बाद उसका किराया 15 सो या 1हजार है लेकिन वह उसे 15 हजार या 10 हजार किराया न ले करके उसे 500 या 1000 रुपये लेता है तो इसको शरीयत की नजर में सूद है जिसको इस्लाम जायज करार नहीं देता है और दारुल उलूम देवबंद फतवा जो है पूरी दुनिया के मुसलमान खासकर हिंदुस्तान के मुसलमान दारुल उलूम देवबंद के फतवे को फॉलो करते हैं और तमाम भी मुसलमान दारुल उलूम देवबंद का फतवा मानते हैं तो यही फतवा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है तो हम भी और तमाम मुसलमान जो है दारुल उलूम देवबंद के फतवे का समर्थन करते हैं और उसको मानते हैं।



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