हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद ब्यूरो) लक्सर। लक्सर 18 मार्च 2019 लक्सर सुल्तानपुर में पलेश्वर तीर्थ स्थान पश्चिमी बहनी बानगंगा में पानी के सूख जाने से लाखों मछलियों की मौत हो गई है। वैसे तो पंचालेश्वर तीर्थ स्थान को महाभारत काल के समय से जोड़ा जाता है उसी स्थान पर भारत की एकमात्र बाणगंगा नदी ऐसी है जो पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बहती है मान्यता है कि अज्ञातवास में पांडवों ने इस गंगा नदी के तट पर रहकर पूजा के लिए इसको अपना तप्त स्थल बनाया था तीर्थ स्थल परब्रह्म वृक्ष के एक साथ पांच पेड़ देखे जाते हैं बताया जाता है कि इन्हीं पेड़ों के नीचे पांडव के पूर्वज चित्र विचित्र ने अपने मनसा के पाप धोने के लिए अग्नि में दग्ध होकर अपने प्राण त्याग दिए थे पूर्वी उत्तर की आई बाढ़ में 3 पेड़ बह गए लेकिन आज भी दो पेड़ इसी स्थान पर विशालकाय रूप में देखे जाते हैं इस पश्चिमी बहनी गंगा पर सरकार की अनदेखी के चलते सरकार ने पूरी तरह से इसको बंद कर दिया है जिससे लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है दशहरा मेला लगने पर लाखों श्रद्धालु दूरदराज से अपने पितरों का श्राद्ध करने आते हैं लेकिन सरकार द्वारा पानी को काफी वर्षों से पूरी तरह से बंद कर दिया गया है आलम यह है कि बाणगंगा नदी में पानी सूख जाने से गंदगी ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है लंबे समय से गर्मी है जिससे बाणगंगा नदी का पानी सूख गया है और लाखों की संख्या में मछलियां तड़प तड़प कर मर गई हैं।



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