(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। पथरी जंगल क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत शाह मोहम्मद शाह उर्फ पाठा पीर दरगाह प्रबंधक द्वारा उर्स की व्यवस्था को लेकर दो दिन पहले किए गए दावे धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। उर्स में श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराये जाने वाली व्यवस्था पूर्ण रूप से पूरी नही की गई है जहां शौचालय, पानी, चिकित्सक आदि व्यवस्थाओं के प्रबंध का ढोल बजाया जा रहा था लेकिन ढोल फटा हुआ साबित हो रहा है। आपको बता दें कि काठा पीर के उर्स में पानी, शौचालय, चिकित्सक की बड़ी दिक्कत सामने आ रही है। उर्स में आने वाले श्रद्धालुओं को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से उर्स में पानी के नल तो लगे हैं लेकिन बाबा की दरगाह पर बड़ी संख्या में पहुंच रही भीड़ के आगे गिने-चुने पानी के नल ना काफी नजर आ रहे हैं। वही शौच के लिए भी प्रशासन द्वारा कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है। महिलाओं को शौच के लिए खेतों में जाना पड़ रहा है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश वासियों को स्वच्छता का नारा लगाकर जागरूक करने में लगे हैं वही सरकारी कर्मचारी प्रधानमंत्री के स्वच्छता के नारे को पतीला लगाने में लगे हुए हैं। उर्स में प्रशासन की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है उर्स के तीसरे दिन सरकारी स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है। स्वास्थ्य शिविर लगाने पहुंचे डॉक्टर दुष्यंत और डॉ चंद्रमोहन ने बताया कि हम लोगो को विभागीय आलाधिकारियों द्वारा आज ही उर्स में स्वास्थ्य शिविर लगाने को कहा गया है। शिविर में एक घंटा बिताने के बाद दोनो डॉक्टर लोग रफूचक्कर हो गये। और शाम तक नहीं दिखे। अब सोचनेे वाली बात है कि उर्स में आने वाले श्रद्धालुओ के लिए दरगाह के खजाने से भारी भरकम धनराशि तो खर्च की जा रही है। लेकिन भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बाद भी श्रद्धालुओं को सही सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन पूर्ण रूप से विफल नजर आ रहा है। जनता की आंखों मे धूल झोंक कर प्रशासन उर्स की खाना पूर्ति करने में लगा है। आखिरकार उर्स की व्यवस्थाओं को दुरुस्त न करने में किस अधिकारी कर्मचारी की लापरवाही है कौन इसका जिम्मेदार है। क्या जिले में बैठे आलाधिकारियों की जिम्मेदारी नही है कि इन सभी समस्याओ को पहले महत्व देना था लेकिन आलाधिकारियों के पास शायद समय ही नही है।
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काठा पीर उर्स की व्यवस्था को लेकर प्रशासन के दावे निकले खोखले: हरिद्वार की गूंज
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