हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। 2013 का निर्भया हत्याकांड हो, दामिनी हत्याकांड या फिर अब मासूम ट्वींकल हत्याकांड, ऐसी दुःखद घटनाओ पर अंकुश लगाने के लिए हमारे देश का संविधान, न्यायिक व्यवस्था और पुलिस कार्य प्रणाली कितनी जिम्मेदार है? मानवाधिकार के नाम पर   जब जब किसी आंतकवादी की फांसी रोकने हेतु देश की सर्वोच्च अदालत को देर रात को भी खोलेगे तो दूषित मानसिकता वाले अपराधी प्रवर्ति के लोगो मे एक अच्छा सन्देश न जाकर गलत संदेश ही जायेगा। देश के बुद्धिजीवी तरह तरह के तर्क देकर जब वो किसी बलात्कारी का पक्ष लेकर उसे बचाने का प्रयास करेंगे तो देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेगी? सऊदी अरब और चाइना जैसे विश्व में ऐसे कई देश है जहाँ भारतीय संविधान नही है। मगर वहाँ अपराधी कोई भी हो, नेता हो, मंत्री हो, या आम जनता कानून सबके लिये बराबर है। वहाँ तारीख पे तारीख देकर केस को कमजोर करने की अपेक्षा अपराधी को सार्वजनिक स्थल पर कड़क सजा देकर अन्ये अपराधीयो और सामान्य जनता में मिशाल दी जाती हैं कि अपराधी चाहे कोई भी हो कानून से ऊपर कोई नही। जो संविधान देश की बेटियों को सुरक्षित समाज देने में असमर्थ है, उसको समय समय पर संसोधन नही करेंगे तो आप देश को सुरक्षा देने में असफल हो। आपको अपने पद पर रहने का कोई मौलिक अधिकार नही। कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है तो जैसी समाज को जरूरत है देश और राज्यो के शासकों को उस जरूरत में ढलने की जरूरत है। देश का सैनिक हो या देश की बेटी उसके जीवन के प्रति यदि हमारा कानून और सरकार संवदेनशील नही तो यह उस देश का दुर्भाग्य होगा। मात्र 2 साल की टिवंकल को कुछ पैसे के लेन देन में या अन्य कारणों के चलते उसके नाजुक, कोमल अंगों को काटा गया, उसके साथ हैवानियत से पेश आने वाले के साथ यदि देश की अदालत उचित समय पर एक आदर्श सज़ा नही देती तो वो दिन दूर नही जब आम जनता का देश के कानून से विश्वास उठ जायेगा। देश की अदालतों और कानून किसी भी मुकदमे को दूसरी निगाह से भी देखता है ये ही टिंकल हत्याकांड यदि किसी केंद्रीय मंत्री की बेटी के साथ होता तो इसे और भी ज्यादा गम्भीरता पूर्वक लिया जाता। माना कि राज्य सरकार द्वारा राज्य सुरक्षा जैसी धाराओ में मुकदमा दर्ज किया हो लेकिन देश की जनता की आंखों में अपराधियों के प्रति जबरदस्त आक्रोश हैं। जिसे केंद्र सरकार और कानून मंत्री को समझने की सख्त जरूरत हैं। ताकि फिर कोई ट्विंकल, दामिनी, निर्भया हत्याकांड होने से समाज की रक्षा हो सके।
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