हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। भारतीय संस्कृति की अलख जगाने शांतिकुंज से परिव्राजक दंपती राजेशभाई भावसार व श्रीमती गीताबेन भावसार आज अमेरिका के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पूर्व अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या व श्रद्धेया शैलदीदी से भेंटकर आशीर्वाद व मार्गदर्शन लिया। इस अवसर पर अपने तीन दशक से अधिक के परिव्रज्या के अनुभवों को साझा करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने परिव्राजक का नैतिक दायित्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज का युवा जिस गति से भागदौड़ में लगा है, ऐसे समय में उनमें भारतीय संस्कृति का बीज बोने से ही भविष्य को संवारा जा सकता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार भारत सहित इंग्लैण्ड, कनाड़ा, साउथ अफ्रीका, जर्मनी, स्वीट्जरलैण्ड आदि देशों के युवाओं में सकारात्मकता व भारतीय संस्कृति के बीज बोने एवं उन्हें उनके जड़ों से जोड़े रखने के लिए विशेष प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि शांतिकुंज से जुड़े कार्यकर्त्ता इस दिशा में पूर्णमनोयोग के साथ जुटे हैं और युवाओं के बीच भारतीय संस्कृति व संस्कार को पुनर्स्थापित करने के विविध आयाम चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश-विदेश में आयोजित होने वाले युवा जागरण शिविर व अन्य आयोजनों के माध्यम से युवाओं को नई दिशा दी जा रही है। इसी क्रम को और अधिक गति देने के उद्देश्य से श्री राजेश भाई भावसार व श्रीमती गीताबेन भावसार को छः माह के  लिए अमेरिका के ह्यूसटन शहर स्थित गायत्री चेतना केन्द्र में परिव्राजक के रूप में भेजा जा रहा है। वहाँ वे संस्कृति व संस्कार से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का संचालन करेंगे। सन् 2014 में गुजरात सरकार से इंजीनियर के पद सेवानिवृत्ति के बाद भावसार दंपती युग निर्माण मिशन के कार्यों हेतु संकल्पित है। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने परिव्राजक दंपती का मंगल तिलक कर उन्हें परिव्राजक के नैतिक दायित्वों का निर्वहन करने हेतु मार्गदर्शन किया। उल्लेखनीय है कि भावसार दंपती इससे पहले एक वर्ष साऊथ अफ्रीका के जोहानसबर्ग तथा छः माह न्यूजर्सी के गायत्री चेतना केन्द्र में समयदान कर चुके हैं। राजेश भाई के पुत्र ज्वलंत भावसार व पुत्रवधु नेहा भावसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता के रूप में सेवारत हैं। शांतिकुंज स्थित विदेश विभाग के अनुसार इस समय गायत्री तीर्थ की चार टोलियाँ कनाड़ा, इंग्लैण्ड, मॉरीशस, फीजी में युवाओं के बीच भारतीय संस्कृति की अलख जगाने में जुटी हैं।
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