हरिद्वार की गूंज (24*7)
(ब्यूरो) मेरठ। मां की चित्कार, बीवी की मनुहार और बाप की पुकार के साथ मासूम बेटी की सूनी आंखें भी आज मेजर केतन को चिर निद्रा से जगाने में नाकाम रहीं। भारत मां का यह लाल आज हमेशा के लिए अपनी मां की गोद में सो गया। कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए मेजर केतन शर्मा का पार्थिव शरीर आज मेरठ लाया गया तो पूरा जिला फूट-फूट कर रोया। शहीद की शहादत को नमन करने के लिए राज्य के गन्ना मंत्री से लेकर कई जनप्रतिनिधि और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों के साथ-साथ सैन्य अफसर भी मौजूद रहे। हजारों नम आंखों के साथ मेजर केतन शर्मा को सूरजकुंड शवदाह स्थल पर अंतिम विदाई दी गई। बताते चलें कि सोमवार को आतंकियों से लोहा लेते समय मेजर केतन शर्मा वीरगति को प्राप्त हो गए थे। मंगलवार की दोपहर केतन शर्मा का पार्थिव शरीर हेलीकॉप्टर द्वारा मेरठ कैंट स्थित आरवीसी सेंटर में लाया गया। यहां केतन के पिता रविंद्र शर्मा, माता उषा, पत्नी इरा सहित परिवार के खास लोगों को केतन का चेहरा दिखाया गया। बिलखते परिजनों को किसी तरह संभालते हुए सैन्य अफसर फूलों से सजे सेना के वाहन से केतन के पार्थिव शरीर को लेकर उनके घर के लिए रवाना हुए। श्रद्धा पुरी कंकरखेड़ा स्थिति शहीद के घर तक रास्ते में हजारों लोगों ने सैन्य वाहन पर फूल बरसाते हुए भारत माता के जयकारों और शहीद केतन अमर रहे के नारों से आसमान को गुंजायमान कर दिया। वहीं श्रद्धा पुरी में सड़कों को फूलों से पाटते हुए शहरवासियों ने देश की रक्षा के लिए शहीद हुए मेरठ के लाल को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा सहित कई जनप्रतिनिधि और अन्य दलों के नेता भी शहीद केतन के घर पर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। कुछ देर बाद परिजन और सैन्य अधिकारी शहीद के पार्थिव शरीर को सैन्य वाहन द्वारा सूरजकुंड स्थित शवदाह स्थल के लिए लेकर रवाना हुए तो रास्ते में शहर के लोगों ने नम आंखों से पुष्प वर्षा करते हुए केतन की शहादत को सलामी दी। सूरजकुंड स्थित शवदाह स्थल पर डीएम अनिल धींगरा सहित कई आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शहीद केतन को श्रद्धांजलि दी। जिसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद पिता रविंद्र ने केतन की चिता को मुखाग्नि दी तो हर किसी की आंख भर आई। मां और पत्नी बार-बार केतन का नाम लेकर उनसे वापस लौट आने की पुकार लगाकर चित्कार रही थीं। ऐसा लगता था मानो किस्मत से सवाल कर रही हों कि उसने हमें ही ऐसा दिन क्यों दिखाया। जिस बेटे की उंगली थाम कर उसे स्कूल छोड़ा करते थे वही रविंद्र शर्मा सूनी आंखों से अपने बेटे की जलती चिता को निहार रहे थे। क्योंकि उन्हें पता था कि अब उनके जिगर का लाल उन्हें कभी दिखाई नहीं देगा। वही इस सबसे बेखबर केतन की साडे 4 वर्षीय मासूम पुत्री काइरा अपनी एक रिश्तेदार की गोदी में बेफिक्री की नींद सो रही थी। उसे यह इल्म भी नहीं था कि उसे झूला झूलाने वाली गोद खुद धरती मां की गोद में सामाने जा रही है। भारत माता जिंदाबाद, जब तक सूरज चांद रहेगा केतन तेरा नाम रहेगा, केतन शर्मा अमर रहें, जैसे नारों से सूरजकुंड स्थित शवदाह स्थल गूंज रहा था। गुस्से और गम के बीच हर किसी व्यक्ति का यही कहना था कि बस अब और नहीं... आतंक के नाम पर अब देश के किसी लाल की कुर्बानी नहीं दी जाएगी। अधिकांश लोगों ने एक स्वर में केंद्र सरकार से पाकिस्तान से आर पार की लड़ाई कर आतंक के इस अध्याय को समाप्त करने की मांग उठाई।



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