हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ० आरिफ
) हरिद्वार। उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश की सीमा पर कच्ची शराब का सेवन कर मौत के आगोश में सोने वाले सैकड़ों से अधिक लोगो का जिम्मेदार कौन होगा। शासन या प्रशासन क्या दोनों राज्यों के आबकारी विभाग के आलाधिकारियों ने अपने कर्मचारियों को निलंबित कर यह दर्शाने की कोशिश की है कि दोनों राज्यों के आलाधिकारी अपने फर्ज के प्रति गंभीर हैं। अगर गंभीर है तो जिले में इतनी बड़ी घटना कैसे घट गई है। वहीं हरिद्वार जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री जन्मेजय खंडूरी ने अपने फर्ज को बेखूबी निभाते हुए 2 दिन में ही जहरीली शराब की घटना के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। इससे यह प्रतीत होता है कि जनपद पुलिस अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर है। अब बात की जाए अपने अनोखे कार्यों के चलते जनता में चर्चित रहने वाले हरिद्वार जिलाधिकारी श्री दीपक रावत की। तो क्या जिलाधिकारी विभागों में छापे मारने तथा ठेलीयो पर सब्जी बेचने वाले गरीब आदमियों का 100, 200 रुपए का पन्नी चालान काटने तक ही सीमित हैं। जिलाधिकारी महोदय ने आबकारी विभाग के आलाधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की। आबकारी विभाग के जिलाधिकारी भी उतने ही दोषी हैं जितने की निलंबित कर्मचारी। जोकि अपने फर्ज के प्रति गंभीर नहीं है। जहरीली शराब की घटना से जहां जिला भर में पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर शराब के कारोबारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज रही है। वहीं सरकारी सुविधा लेने वाले आबकारी विभाग के आलाधिकारी कुंभकरण की नींद सोकर हर महीने लाखों रुपए का सरकार को चुना लगा रहे हैं। शासन तथाा जिलाधिकारी महोदय को तत्काल ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई कर उन्हें निलंबित कर देना चाहिए। आपको बतादे कि जिलेभर में अवैध शराब तथा कच्ची शराब का कारोबार अपने पूरे चरण पर है। शाम ढलते ही शराब के खिलाड़ी अपने बिलों से निकल कर सभी अवैैैध शराब की सप्लाई करने में लग जाते हैं। देखा जा सकता है कि होटल ढाबों तथा शहर की सड़कों पर खड़ी ठेलियों पर खुलेआम अवैध शराब का सेवन किया जाता है। लेकिन विभागीय अधिकारी मूर्खदर्शक की भूमिका निभाकर अवैध शराब के कारोबार को और पंख लगा रहा है। समाचार पत्रों तथा सोशल मीडिया पर पुलिस प्रशासन की खबरें अवैध शराब के खिलाफ तो देखी जा सकती है। लेकिन आबकारी विभाग कि कोई भी कार्रवाई समाचार पत्रों में देखी नहीं जा रही है। इससे पूर्ण रुप से अनुमान लगाया जा सकता है कि आबकारी विभाग पूरी तरह से नाकारा हो चुका है।
(मौ० आरिफ
) हरिद्वार। उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश की सीमा पर कच्ची शराब का सेवन कर मौत के आगोश में सोने वाले सैकड़ों से अधिक लोगो का जिम्मेदार कौन होगा। शासन या प्रशासन क्या दोनों राज्यों के आबकारी विभाग के आलाधिकारियों ने अपने कर्मचारियों को निलंबित कर यह दर्शाने की कोशिश की है कि दोनों राज्यों के आलाधिकारी अपने फर्ज के प्रति गंभीर हैं। अगर गंभीर है तो जिले में इतनी बड़ी घटना कैसे घट गई है। वहीं हरिद्वार जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री जन्मेजय खंडूरी ने अपने फर्ज को बेखूबी निभाते हुए 2 दिन में ही जहरीली शराब की घटना के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। इससे यह प्रतीत होता है कि जनपद पुलिस अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर है। अब बात की जाए अपने अनोखे कार्यों के चलते जनता में चर्चित रहने वाले हरिद्वार जिलाधिकारी श्री दीपक रावत की। तो क्या जिलाधिकारी विभागों में छापे मारने तथा ठेलीयो पर सब्जी बेचने वाले गरीब आदमियों का 100, 200 रुपए का पन्नी चालान काटने तक ही सीमित हैं। जिलाधिकारी महोदय ने आबकारी विभाग के आलाधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की। आबकारी विभाग के जिलाधिकारी भी उतने ही दोषी हैं जितने की निलंबित कर्मचारी। जोकि अपने फर्ज के प्रति गंभीर नहीं है। जहरीली शराब की घटना से जहां जिला भर में पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर शराब के कारोबारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज रही है। वहीं सरकारी सुविधा लेने वाले आबकारी विभाग के आलाधिकारी कुंभकरण की नींद सोकर हर महीने लाखों रुपए का सरकार को चुना लगा रहे हैं। शासन तथाा जिलाधिकारी महोदय को तत्काल ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई कर उन्हें निलंबित कर देना चाहिए। आपको बतादे कि जिलेभर में अवैध शराब तथा कच्ची शराब का कारोबार अपने पूरे चरण पर है। शाम ढलते ही शराब के खिलाड़ी अपने बिलों से निकल कर सभी अवैैैध शराब की सप्लाई करने में लग जाते हैं। देखा जा सकता है कि होटल ढाबों तथा शहर की सड़कों पर खड़ी ठेलियों पर खुलेआम अवैध शराब का सेवन किया जाता है। लेकिन विभागीय अधिकारी मूर्खदर्शक की भूमिका निभाकर अवैध शराब के कारोबार को और पंख लगा रहा है। समाचार पत्रों तथा सोशल मीडिया पर पुलिस प्रशासन की खबरें अवैध शराब के खिलाफ तो देखी जा सकती है। लेकिन आबकारी विभाग कि कोई भी कार्रवाई समाचार पत्रों में देखी नहीं जा रही है। इससे पूर्ण रुप से अनुमान लगाया जा सकता है कि आबकारी विभाग पूरी तरह से नाकारा हो चुका है।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours