हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। हमारे देश की आबादी एक अरब को पार कर चुकी है व तमाम समस्यायें कुण्डली मार कर बैंठी हैं भारत एक ऐसा देश है जहां जनता अपने पसंद की सरकार चुनती है सरकारें कार्यपालिका न्याय पालिका विधायिका की मदद से जनता की समस्याओं व मूलभूत आवस्यकताओं को ध्यान में रखते हुये काम करती हैं हांलाकि मीडिया जिसे चौथा स्तंम्भ कहा जाता है उसकी भी एक अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता क्यों कि जनता व सरकार के साथ एक सेतु का कार्य मीडिया का होता है, अब हमको यह जानना जरूरी है कि मीडिया आखिर है क्या? बृटिश शासन में जब टी०बी व मोबाईल आदि नहीं थे व अंग्रेजों के अत्याचारों को प्रत्येक भारत वासियों तक पहुचाने का काम मीडिया का था सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उस समय मीडिया ने निभाई, मीडिया हमारे चारो ओर रहती है कहीं टी०वी तो कहीं समाचार पत्र व पत्रिकायें व न्यूज पोर्टल आदि के रूप में आप देखते हैं, जिस सिंहासन पर सत्ता काबिज है यदि उसका एक पाया टूट जाये तो या खराब हो जाये तो राजा की आन बान खतरे में पड़ जायेगी, मीडिया की महत्वता को देखते हुये अमेरिका के राष्ट्रपति थोमस जोफरसन ने कहा था कि यदि सरकार व अखबार में किसी एक को चुनने के लिए कहा जाये तो मैं अखबार को चुनूंगा, सरकारें रहे ना रहे परन्तु मीडिया का अस्तित्व तो रहना चाहिए, विश्व में अमेरिका के अलावा कई पश्चिमी देशों में मीडिया को स्वतंत्रत रखा गया है, क्या भारत में भी ऐसा ही है, परन्तु संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए)  के अनुसार हिन्दुस्तान में रहने वाले सभी नागरिकों को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी मिली हुई है वही मीडिया को भी है मीडिया को अलग से कोई अधिकार नहीं दिया गया जबकि मीडिया के बिना सरकार अधूरी है, परन्तु आज मीडिया सत्ताधारियों का एक शशक्त उपकरण बन चुका है, विधायिका व कार्यपालिका तो एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं परन्तु मीडिया व सरकार के रिस्ते अच्छे होना असंम्भव है, मीडिया वह मौका देती है कि सरकारें जनभावनाओं के अनुरूप काम करें।
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