हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद ब्यूरो) लक्सर। लक्सर ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत खरंजा कुतुबपुर गांव मे पिछले दो वर्षों से पानी की टंकी बिल ज्यादा होने की वजह से ठप पड़ी हुई है। पानी की टंकी का करीब 12 लाख रुपये से अधिक बिजली का बिल बकाया है। पानी की टंकी ठप होने की वजह से गांव के ग्रामीण गंदा पानी पीने पर मजबूर है। ग्रामीणों ने टंकी चालू करने के लिए कई बार ग्राम प्रधान व विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने पूर्व प्रधान पर टंकी निर्माण में लाखों रुपए की हेरा फेरी करने का भी आरोप लगाया है। टंकी का निर्माण लगभग 10 साल पहले पूर्व प्रधान नसीर अहमद द्वारा कराया गया था। पूर्व प्रधान नसीर अहमद ने पानी की टंकी चालू तो करा दी थी। लेकिन टैंक नहीं बनाया गया था। इसके बाद पानी की टंकी बिना टैंक के ही चालू कर दी गई। तथा वह कई सालो तक ठीक-ठाक चली। उसके बाद टंकी पर ज्यादा भीड़ होने की वजह से विभाग ने उस पर ताला जड़ दिया था। तथा वेस्टर्न कि पिछले 2 साल से ठप पड़ी हुई है। टंकी बंद होने के कारण खरंजा कुतुबपुर गांव के ग्रामीणों को पानी की एक एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। खरंजा कुतुबपुर गांव में पानी की टंकी का निर्माण ग्रामीणों को शुद्ध पानी पीने के लिए कराया गया था। लेकिन पानी की टंकी में लाखों रुपए की हेरा फेरी होने की वजह से आज टंकी की हालत यह है कि वह पिछले दो वर्षों से ठप पड़ी हुई है। टंकी ठप होने की वजह से खरंजा कुतुबपुर गांव के ग्रामीणों को साफ पानी पीने के लिए एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों गांव के कुछ जिम्मेदार लोगों ने ठप पड़ी पानी की टंकी को चलाने के लिए प्रत्येक ग्रामीणों से 200 रुपये वसूले थे। जिम्मेदार लोगों ने ग्रामीणों से पैसे लेते वक्त कहा था कि यह पैसा जो इकट्ठा होगा, बिजली विभाग को जमा किया जाएगा। इसके बाद ही पानी की टंकी चल पाएगी। भोले-भाले ग्रामीणों ने जिम्मेदार लोगों को पैसे इकट्ठे करके लगभग 70 हजार रुपये दे दिए। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा 70 हजार रुपये देने के बाद भी पानी की टंकी महज दो महीने ही चल सकी। इसके बाद बिजली विभाग ने बिल का पैसा ज्यादा होने के चलते टंकी पर ताला लटका दिया तथा पानी की सप्लाई गांव में बंद कर दी। पानी की सप्लाई बंद होने के बाद हजारों ग्रामीणों को साफ पानी पीने के लिए नहीं मिल रहा है तथा ग्रामीण खराब हुआ क्षतिग्रस्त हैंडपंपों से पानी भरकर पी रहे हैं। जिससे उनके घरों में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ठप पड़ी टंकी को चालू कराने के लिए कई बार ग्राम प्रधान व अधिकारियों को कहा जा चुका है। लेकिन ग्राम प्रधान व अधिकारियों ने टंकी की कोई सुध नहीं ली है। लिहाजा ग्रामीणों को गंदा पानी पीना पड़ रहा हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खरंजा कुतुबपुर गांव में पानी की टंकी तो ठप ही पड़ी है। वहीं दूसरी ओर गांव में नाली की साफ-सफाई भी नहीं की जाती है। जिससे नालिया कूड़े करकट में चोक पड़ी हुई है। नाली चोक होने की वजह से उनमें मच्छर पैदा हो रहे हैं। जिससे ग्रामीणों पर बड़ी बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि टंकी निर्माण में की गई लाखों रुपए की धोखाधड़ी किसी को भी मालूम न चल सकी तथा पूर्व प्रधान लाखों रुपए गटार गया। इसका खामियाजा सीधा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। गांव के ग्रामीणों ने कई बार ठप पड़ी पानी की टंकी को चालू करने की कोशिश की। लेकिन उनकी कोशिश नाकामयाब रही। लिहाजा गांव के भोले-भाले ग्रामीणों को गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि खरंजा कुतुबपुर गांव में पिछले दो साल से ठप पड़ी पानी की टंकी को चालू कराने के लिए कौन आगे आता है। यह बड़ा सवाल ग्रामीणों की जबा पर बना हुआ है। उधर विभाग के अधिकारी भी इस मामले में कुछ कहने से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। तथा मौजूदा प्रधान ने भी टंकी को चालू कराने के लिए चुप्पी साधी हुई है। उधर, खरंजा कुतुबपुर गांव के बीचो-बीच एक बहुत ही बड़ा कूड़े का ढेर लगा हुआ है। जिससे आने-जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में कूड़े के ढेर से कूड़ा नालियों में भर जाता है। जिससे नालियां पूरी तरह चौक हो जाती है। इतना ही नहीं मेन रोड के बराबर में कूड़े का ढेर लगे होने की वजह से आने जाने वाले लोगों को बदबू का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार जमीन स्वामी से कूड़े का ढेर हटाने के लिए कहा, लेकिन कूड़े का ढेर सालों से ज्यो का त्यों पढ़ा हुआ है। उच्चधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कब तक यह कूड़े का ढेर हट पाता है या नहीं।
(फिरोज अहमद ब्यूरो) लक्सर। लक्सर ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत खरंजा कुतुबपुर गांव मे पिछले दो वर्षों से पानी की टंकी बिल ज्यादा होने की वजह से ठप पड़ी हुई है। पानी की टंकी का करीब 12 लाख रुपये से अधिक बिजली का बिल बकाया है। पानी की टंकी ठप होने की वजह से गांव के ग्रामीण गंदा पानी पीने पर मजबूर है। ग्रामीणों ने टंकी चालू करने के लिए कई बार ग्राम प्रधान व विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने पूर्व प्रधान पर टंकी निर्माण में लाखों रुपए की हेरा फेरी करने का भी आरोप लगाया है। टंकी का निर्माण लगभग 10 साल पहले पूर्व प्रधान नसीर अहमद द्वारा कराया गया था। पूर्व प्रधान नसीर अहमद ने पानी की टंकी चालू तो करा दी थी। लेकिन टैंक नहीं बनाया गया था। इसके बाद पानी की टंकी बिना टैंक के ही चालू कर दी गई। तथा वह कई सालो तक ठीक-ठाक चली। उसके बाद टंकी पर ज्यादा भीड़ होने की वजह से विभाग ने उस पर ताला जड़ दिया था। तथा वेस्टर्न कि पिछले 2 साल से ठप पड़ी हुई है। टंकी बंद होने के कारण खरंजा कुतुबपुर गांव के ग्रामीणों को पानी की एक एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। खरंजा कुतुबपुर गांव में पानी की टंकी का निर्माण ग्रामीणों को शुद्ध पानी पीने के लिए कराया गया था। लेकिन पानी की टंकी में लाखों रुपए की हेरा फेरी होने की वजह से आज टंकी की हालत यह है कि वह पिछले दो वर्षों से ठप पड़ी हुई है। टंकी ठप होने की वजह से खरंजा कुतुबपुर गांव के ग्रामीणों को साफ पानी पीने के लिए एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों गांव के कुछ जिम्मेदार लोगों ने ठप पड़ी पानी की टंकी को चलाने के लिए प्रत्येक ग्रामीणों से 200 रुपये वसूले थे। जिम्मेदार लोगों ने ग्रामीणों से पैसे लेते वक्त कहा था कि यह पैसा जो इकट्ठा होगा, बिजली विभाग को जमा किया जाएगा। इसके बाद ही पानी की टंकी चल पाएगी। भोले-भाले ग्रामीणों ने जिम्मेदार लोगों को पैसे इकट्ठे करके लगभग 70 हजार रुपये दे दिए। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा 70 हजार रुपये देने के बाद भी पानी की टंकी महज दो महीने ही चल सकी। इसके बाद बिजली विभाग ने बिल का पैसा ज्यादा होने के चलते टंकी पर ताला लटका दिया तथा पानी की सप्लाई गांव में बंद कर दी। पानी की सप्लाई बंद होने के बाद हजारों ग्रामीणों को साफ पानी पीने के लिए नहीं मिल रहा है तथा ग्रामीण खराब हुआ क्षतिग्रस्त हैंडपंपों से पानी भरकर पी रहे हैं। जिससे उनके घरों में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ठप पड़ी टंकी को चालू कराने के लिए कई बार ग्राम प्रधान व अधिकारियों को कहा जा चुका है। लेकिन ग्राम प्रधान व अधिकारियों ने टंकी की कोई सुध नहीं ली है। लिहाजा ग्रामीणों को गंदा पानी पीना पड़ रहा हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खरंजा कुतुबपुर गांव में पानी की टंकी तो ठप ही पड़ी है। वहीं दूसरी ओर गांव में नाली की साफ-सफाई भी नहीं की जाती है। जिससे नालिया कूड़े करकट में चोक पड़ी हुई है। नाली चोक होने की वजह से उनमें मच्छर पैदा हो रहे हैं। जिससे ग्रामीणों पर बड़ी बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि टंकी निर्माण में की गई लाखों रुपए की धोखाधड़ी किसी को भी मालूम न चल सकी तथा पूर्व प्रधान लाखों रुपए गटार गया। इसका खामियाजा सीधा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। गांव के ग्रामीणों ने कई बार ठप पड़ी पानी की टंकी को चालू करने की कोशिश की। लेकिन उनकी कोशिश नाकामयाब रही। लिहाजा गांव के भोले-भाले ग्रामीणों को गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि खरंजा कुतुबपुर गांव में पिछले दो साल से ठप पड़ी पानी की टंकी को चालू कराने के लिए कौन आगे आता है। यह बड़ा सवाल ग्रामीणों की जबा पर बना हुआ है। उधर विभाग के अधिकारी भी इस मामले में कुछ कहने से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। तथा मौजूदा प्रधान ने भी टंकी को चालू कराने के लिए चुप्पी साधी हुई है। उधर, खरंजा कुतुबपुर गांव के बीचो-बीच एक बहुत ही बड़ा कूड़े का ढेर लगा हुआ है। जिससे आने-जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में कूड़े के ढेर से कूड़ा नालियों में भर जाता है। जिससे नालियां पूरी तरह चौक हो जाती है। इतना ही नहीं मेन रोड के बराबर में कूड़े का ढेर लगे होने की वजह से आने जाने वाले लोगों को बदबू का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार जमीन स्वामी से कूड़े का ढेर हटाने के लिए कहा, लेकिन कूड़े का ढेर सालों से ज्यो का त्यों पढ़ा हुआ है। उच्चधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कब तक यह कूड़े का ढेर हट पाता है या नहीं।



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