हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। एक भेंट वार्ता में श्री संतोष यादव ने कहा कि शिव तथा पार्वती का मंगलमय स्वरूप ही बृम्ह तथा माया का प्रतीक है शिव तथा शक्ति का समन्वय प्रकृति व जीव जो हमको दिखता है वह माया है जो अदृश्य व कण कण में समाहित है वह बृम्ह है शिव से यदि ई कार हटा दिया जाय तो शव बचता है शक्ति के बिना हम निष्प्राण हैं यह तो सत्य है हमारें अन्दर मौजूद जीवात्मा ही ईश्वर का संकेत देती है भोले नाथ खुश थे नाँच रहे थे एक बार की घटना है मॉ पार्वती पूछती है स्वामी ऐसी क्या खुशी है जो आप नाँच रहे हैं ताण्डव कर रहे हैं? भोले नाथ ने कहा जब हमारे संसार का प्रत्येक प्राणी भोजन कर लेता है तो मुझे बेहद प्रसन्नता होती है तो सारे संसार में कोई भी भूखा नहीं रहता मॉ पार्वती ने पूछा? हाँ देवी कोई भी भूखा नहीं रहता तब मैं ताण्डव करता हूँ, मॉ पार्वती ने दूसरे दिन मंदिर में एक चींटी को एक डिबिया में बंद कर दिया व जब शाम को भोले नाथ ताण्डव करने लगे तो मॉ पार्वती ने पुनः प्रश्न किया नाथ क्या संसार में कोई भूखा नहीं है ठीक से ध्यान लगा कर देख लो, भोले नाथ ने ध्यान लगाया व कहा नहीं देवि कोई भूखा नहीं है, मॉ पार्वती वह डिबिया लेकर आतीं हैं व डिबिया खोलने से पहले ही भगवान भोले नाथ मुस्कराते हुये, बोले देवि जिस समय तुम चींटी को बंद कर रही थीं उसी समय तुम्हारे माथे पर लगा एक चावल का दाना भी डिबिया में गिर गया था व वह दाना इस चींटी के लिए तीन दिन का भोजन था, माँ शांत भाव होकर खड़ी रहीं बोली स्वामी वास्तव में आपकी महिमा व दया अपरंपार है।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। एक भेंट वार्ता में श्री संतोष यादव ने कहा कि शिव तथा पार्वती का मंगलमय स्वरूप ही बृम्ह तथा माया का प्रतीक है शिव तथा शक्ति का समन्वय प्रकृति व जीव जो हमको दिखता है वह माया है जो अदृश्य व कण कण में समाहित है वह बृम्ह है शिव से यदि ई कार हटा दिया जाय तो शव बचता है शक्ति के बिना हम निष्प्राण हैं यह तो सत्य है हमारें अन्दर मौजूद जीवात्मा ही ईश्वर का संकेत देती है भोले नाथ खुश थे नाँच रहे थे एक बार की घटना है मॉ पार्वती पूछती है स्वामी ऐसी क्या खुशी है जो आप नाँच रहे हैं ताण्डव कर रहे हैं? भोले नाथ ने कहा जब हमारे संसार का प्रत्येक प्राणी भोजन कर लेता है तो मुझे बेहद प्रसन्नता होती है तो सारे संसार में कोई भी भूखा नहीं रहता मॉ पार्वती ने पूछा? हाँ देवी कोई भी भूखा नहीं रहता तब मैं ताण्डव करता हूँ, मॉ पार्वती ने दूसरे दिन मंदिर में एक चींटी को एक डिबिया में बंद कर दिया व जब शाम को भोले नाथ ताण्डव करने लगे तो मॉ पार्वती ने पुनः प्रश्न किया नाथ क्या संसार में कोई भूखा नहीं है ठीक से ध्यान लगा कर देख लो, भोले नाथ ने ध्यान लगाया व कहा नहीं देवि कोई भूखा नहीं है, मॉ पार्वती वह डिबिया लेकर आतीं हैं व डिबिया खोलने से पहले ही भगवान भोले नाथ मुस्कराते हुये, बोले देवि जिस समय तुम चींटी को बंद कर रही थीं उसी समय तुम्हारे माथे पर लगा एक चावल का दाना भी डिबिया में गिर गया था व वह दाना इस चींटी के लिए तीन दिन का भोजन था, माँ शांत भाव होकर खड़ी रहीं बोली स्वामी वास्तव में आपकी महिमा व दया अपरंपार है।



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