हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान यहाँ की जनता ने भाजपा को इस उम्मीद में अपना वोट और स्पोर्ट दिया कि केंद्र और राज्य में एक ही सरकार होने का जनता को भी लाभ मिलेगा। जिसे "डबल इंजन" सरकार के नाम से भी जाना गया। डबल इंजन के एक इंजन के ड्राइवर आरएसएस के आरक्षण से बड़े पद पर बैठने के कारण राज्य सरकार के इंजन की हालत इन दिनों खराब है। जिसका खामियाजा स्थानीय जनता के अलावा हरिद्वार आने वाले यात्रियों को भी भुगतना पड़ है। पिछले एक साल में जिला प्रशासन द्वारा गड्डो को भरने के लिए 10 से ज्यादा बार सड़क निर्माण संस्थाओं के अधिकारियों को चेतावनी देने के बावजूद राष्ट्रीय राज मार्ग में 10 से 12 इंच गहरे गड्ढे है। जिससे चोटिल होकर राहगीर भारी असुविधा का सामना कर रहे है। उत्तराखंड सरकार और हरिद्वार प्रशासन की हालत ऐसी हो रखी है कि खराब सड़को का उचित समाधान करने के बजाय सड़को में ईंटो से खडंजा लगाने को विवश हैं। पीड़ित वाहन चालक और उनके प्रियजन अपना रोष वाट्सप और फेसबुक पर यह कहकर जता रहे हैं कि हाई कोर्ट, हेलमेट पहनने पर तो जोर शोर से लगा है मगर टूटी सड़को पर सरकार और जिला प्रशासन पर भी तो बड़ा जुर्माना लगना चाहिए। हरिद्वार जर्स कंट्री, गुरुकुल कांगड़ी, सिंहद्वार, चंद्रा चार्य चौक आदि अनेक स्थल हैं जहाँ पर कारो की चेसिस सड़क में अड़ कर गाड़ियों की मेंटेनेंस बढ़ा रही है। सभी प्रकार के मोटर वाहन रोड टेक्स देकर ही सड़को पर अपना वाहन उतारते हैं। उसके बदले उन्हें मिलती है टूटी फूटी खड़ंजे वाली गड्ढे युक्त सड़के। ये तो वहीं बात हुई कि मूल्य चुका रहे वुडलैंड जूते के, और दुकानदार बदले में टूटे फ़टे हुवे जूते पकडा दे। तो जनता का जिला प्रशासन और राज्य सरकार के प्रति रोष जायज है। दूसरी मजेदार बात जहाँ सड़को की हालत थोड़ी सी सही है वहाँ दुर्घटनाओं को रोकने के नाम पर 10-10 के ग्रुप में स्पीड ब्रेकर बनाकर कोढ़ में खाज लगाने वाला कार्य कर दिया। जबकि हरिद्वार में दीपक रावत जैसा तेज तर्रार अधिकारी ऐसा मिला है जो कि किसी जनपद को मिलना आसान नही। उसके बावजूद हरिद्वार में ऐसे भी बहानेबाज अधिकारी है जिन पर दीपक रावत जैसे कड़क, अनुशासित अधिकारी की चेतावनी भी बेअसर है। यदि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इन गड्ढे वाली सड़को का समाधान नही किया तो इसका खामियाजा उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
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