हरिद्वार की गूंज
(अब्दुलसत्तार) हरिद्वार। ज्वालापुर उपनगरी मे अहबाबनगर के कब्रिस्तान के सामने नगर निगम के कर्मचारी पूरे शहर का कूडा इस प्रकार डाल रहे है, जैसे की वहाँ इंसान नही रहते है, इतनी गन्दगी एक साव्रजनिक स्थल के सामने पडी रहना ये बात साबित करती है, क्या यही है, भारत स्वच्छ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री जी का सपना जिस प्रकार शासन प्रशासन के लोग साव्रजनिक स्थलो के इतने बडे कूडे के ढेर लगाकर जन समुदाय को बीमारियों की तरफ धकेल रही है, शहर के अन्दर कूडे के अम्बार लगे हुए है, नगर निगम के मेयर और कर्मचारी नींद मे पडे आराम से सन्नाटे लगा रहे है, नगर निगम को अपने काम के फर्ज का भी ज्ञान नही है, शहर मे कूडे के ढेर लगे है, लेकिन कूडे दान रखने तक के बारे मे नगर निगम के काबिल कर्मचारी रखने को तैयार नही है, सफाई कर्मी कूडे के ढेर लगाकर चले जाते है, लेकिन कोई उसे कूडे को उठाने वाला नही पहुँचता है, उस कूडे के ढेर के एक ढेर के कई ढेर हो जाते है,लेकिन उठाने वाला कोई भी कर्मचारी नही आता है, आखिर इस प्रकार तो भारत स्वच्छ नही होगा, समाज को ही आगे आने की जरूरत है, तब ही भारत स्वच्छ का सपना साकार होगा।
(अब्दुलसत्तार) हरिद्वार। ज्वालापुर उपनगरी मे अहबाबनगर के कब्रिस्तान के सामने नगर निगम के कर्मचारी पूरे शहर का कूडा इस प्रकार डाल रहे है, जैसे की वहाँ इंसान नही रहते है, इतनी गन्दगी एक साव्रजनिक स्थल के सामने पडी रहना ये बात साबित करती है, क्या यही है, भारत स्वच्छ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री जी का सपना जिस प्रकार शासन प्रशासन के लोग साव्रजनिक स्थलो के इतने बडे कूडे के ढेर लगाकर जन समुदाय को बीमारियों की तरफ धकेल रही है, शहर के अन्दर कूडे के अम्बार लगे हुए है, नगर निगम के मेयर और कर्मचारी नींद मे पडे आराम से सन्नाटे लगा रहे है, नगर निगम को अपने काम के फर्ज का भी ज्ञान नही है, शहर मे कूडे के ढेर लगे है, लेकिन कूडे दान रखने तक के बारे मे नगर निगम के काबिल कर्मचारी रखने को तैयार नही है, सफाई कर्मी कूडे के ढेर लगाकर चले जाते है, लेकिन कोई उसे कूडे को उठाने वाला नही पहुँचता है, उस कूडे के ढेर के एक ढेर के कई ढेर हो जाते है,लेकिन उठाने वाला कोई भी कर्मचारी नही आता है, आखिर इस प्रकार तो भारत स्वच्छ नही होगा, समाज को ही आगे आने की जरूरत है, तब ही भारत स्वच्छ का सपना साकार होगा।



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