हरिद्वार की गूंज
(रजत चौहान) हरिद्वार। हरिद्वार मे और आसपास के क्षेत्रो मे लगातार अवैध शराब का कारोबार दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है, सबका साथ सबका विकास के नारे की साथ पुलिस ने हरिद्वार कनखल ज्वालापुर के क्षेत्रो मे अवैध शराब का विकास कर रखा है, इस अवैध शराब के धन्धे से लगातार पुलिस की कमजोरी कहे या मिली भगत कहे नशेदियो का तो विकास हो रही रहा है, आखिर पुलिस को समाज के जीवन की कोई फिक्र क्यो नही है, क्या पुलिस ने अपना जमीर बेच दिया है, पुलिस यदि चाहे तो मस्जिद, मंदिर, आश्रम, मदरसो, गुरूद्वारो, चर्च आदि के द्वार के सामने से चप्पल भी नही उठा सकता है, लेकिन पता पुलिस अवैध शराब के कारोबार को और बिकने वाले ठिकानो पर क्यो अंकूश लगा पा रही है, फिर तो पुलिस का समाज मे कोई महत्तव नही रह जाता है, कोई उच्च अधिकारी बता सकता है, कि क्षेत्रीय पुलिस कब अपनी कार्यप्रणाली मे सुधार करेगी, करेगी या नही या अवैध धन्धो का ही विकास पुलिस करती रहेगी, वर्तमान मे तो ऐसा ही लग रहा की पुलिस अपनी कार्यप्रणाली मे सुधार नही करना चाहती क्योकि कार्यवाही करने से पुलिस की आमदनी खत्म होने का डर है, कौन आती हुई लक्ष्मी को लात मारना चाहेगा,  शायद पुलिस विभाग मे तैनात पुलिस कर्मियो को संविधान और देश व समाज की रक्षा की जो शपथ दिलवाई जाती है, तो वो शपथ चौकियो और थानो, कोतवाली के अन्दर प्रवेश करके और अपने पदो पर बैठकर भूल जाते है, जो बीच बीच मे पुलिस को पुलिस के कार्य याद दिलवाने पडते है, लेकिन याद दिलवाने के बाद भी पुलिस के कानो पर समाज की जिम्मेदारी के प्रति जू तक नही रेगती है, आखिर क्या अवैध शराब के धन्धो और नशे की साम्रग्रियो के ऊपर पुलिस अंकूश नही लगा सकती है, फिलहाल तो पुलिस शायद सो रही है, यदि पुलिस जागी भी तो केवल इतनी कार्यवाही करेगी जैसे ऊँट के मुँह मे जीरा, तो समाज को ही आगे आने की जरूरत है।
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