हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(यतेंद्र कुमार) हरिद्वार। सरकार द्वारा निर्धारित पार्कों के सोन्द्रिकरण के लिए हर शहर हर गाँव में जोर दिया गया था। और इसके लिए अभियान भी चलाया गया। जिसमें यह निर्धारित किया गया कि हर क्षेत्र में चाहे शहर हो या कस्बे जितने भी पार्क बने हैं उनका सोन्द्रिकरण व पुनः निर्माण किया जाना चाहिए। और कुछ हद तक यह कार्यक्रम चलाया भी गया और पार्कों को पुनः निर्माण व सोन्द्रिकारण कराया गया। पर कुछ जगहों पर पार्कों की खुदाई करने के बाद उसमें घास व झाड़ियों को उगने के लिए छोड़ दिया गया। और निर्माण कार्य भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। ऐसा नजारा हरिद्वार के अनेकों जगहों पर देखा गया है। जिसमें एक शिवलोक कॉलोनी भी शामिल हैं। जिसमें तीन चार पार्क में से केवल एक ही पार्क को निर्मित किया गया। बाकी बचे हुए पार्क आज भी जैसे के तैसे ही पड़े हुए हैं। ना कोई बेंच ना कोई झूला और ना ही फूल पौधे अगर कुछ दिखाई दे रहा है तो वो है केवल बड़ी बड़ी घास व झाड़िया।ये सब दर्शाता है। कि सरकार द्वारा किए गए वादे हवाई फायरिंग की तरह साबित हो रहे हैं जो गोली की तरह निकलते तो है पर टारगेट तक कभी नहीं पहुँच पाते। यहीं हाल हमारे सन्त्रियो, मन्त्रयों का भी है जो चुनावी दौर में तो आप को अनेकों वादे करते हैं। लेकिन चुनाव बीतते ही कहीं विलुप्त हो जाते हैं।
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