हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। अलीगढ़ मे जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 पहुँच गयी है। कानून व्यवस्था के विषय मे सख्त स्वभाव वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषी अपराधियो पर एनएसऐ लगाने की पुलिस को सलाह दी है। किसी भी राज्य या जनपद में कानून व्यवस्था कायम रखने में वहां की पुलिस और राज्य सरकार की व्यक्तिगत रुचि की बहुत बड़ी भूमिका होती है। उदाहरण के लिये 1993 के समय पंजाब से उग्रवादियों को खदेड़ने में वहाँ उस समय के डीजीपी के.पी.एस गिल और मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का सराहनीय आपसी तालेमल। उत्तराखंड में हरिद्वार जनपद के एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्ण राज एस० के दिशा निर्देश में जो अपराधियो पर नियंत्रण हेतु कार्यवाही की जा रही है वो बहुत कुछ सीख देती हैं। पश्चिम बंगाल का राज्य हो या देश का अन्य कोई राज्य यदि किसी राज्य में कानून व्यवस्था नियंत्रण में नही है तो उसका बहुत बड़ा कारण उसके जिम्मेदार शासक और अधिकारियों में व्यक्तिगत रुचि का अभाव बहुत बड़ा कारण पाया जाता है। घटना अलीगढ़ की हो या हरिद्वार की उस घटना के बाद वहाँ के जिम्मेदार पुलिस के आला अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिये क्या आवश्यक दिशा निर्देश अपने अधिकारियों को दिए ये भी महत्वपूर्ण है। जनता का कहना कि अपराधियों से पुलिस की गठजोड़ के बिना उनके क्षेत्र में अपराध नही फल फूल सकता है। तो यदि पथरी थाने के अंतर्गत अवैध शराब पर पुलिस निरन्तर कार्यवाही कर रही है तो इसका मतलब उस क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी के लिये उसके फर्ज से बढ़कर कुछ नही। पथरी थानाध्यक्ष अमर चंद शर्मा अवैध शराब के खिलाफ अपने सहयोगीयो के साथ जान हथेली पर रखकर कार्यवाही सराहनीय है। वो दिन रात की परवाह किये बिना लगातार जंगली इलाको में आबादी में छापेमारी करके अवैध शराब के कारोबारीयो की नाक में दम कर रखा है। अपराध में लिप्त लोग अमरचंद शर्मा जैसे अधिकारी को हटाने के लिये हर तरह के हतकण्डे प्रशासन और सरकार में आजमाते है। मगर कहावत है कि "स्थान्तरण से अमरचंद शर्मा जैसे अधिकारी के इलाके बदलते हैं इरादे नही। राज्य सरकार को चाहिए कि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से सीखे कि कैसे पुलिस विभाग मे उत्कृष्ट सेवा देने वाले अधिकारीयो और उनके स्टाफ का मनोबल बढ़ाकर रखना है। क्योकि बहुत बड़ा रिस्क लेकर किसी के घर या जंगल मे पुलिस छापामारी करती हैं। ऐसे में कई बार जान भी चली जाती हैं। मगर अपराधी कई बार आसानी से जमानत पर रिहा होकर फिर से अपराध की दुनिया मे लग जाते हैं। ऐसे में किसी भी जनपद, राज्य में कानून व्यवस्था बनाने के लिये जरूरी है कि राज्य सरकार आवश्यकतानुसार कानून में बदलाव लाये।

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