हरिद्वार की गूंज (24*7)

(अविनाश गुप्ता) हरिद्वार। महाकुंभ हरिद्वार में  श्री अखण्ड परशुराम अखाड़े एवं अग्नि की पेशवाई यात्रा बैंड बाजे,सुंदर सुंदर झकिया, रथो ओर घोड़ों पर विराजमान साधु संतो के सानिध्य में निकली।12वर्षों बाद महाकुंभ मेले का आयोजन होता है ओर कुंभ में तपस्वी साधु संत,नागा सन्यासियों का आगमन होता है जिनके दर्शन मात्र से ही दुख दर्द दूर हो जाते है पेशवाई आज धर्मनगरी हरिद्वार के परशुराम चौक से शुरू होकर शहर भ्रमण करते हुए नीलधारा में बने कुम्भ छावनी में प्रवेश किया। दो पीठो ज्योतिष और द्वारिका के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती इन दिनों कुम्भ नगरी हरिद्वार में है। जहाँ शंकराचार्य दो दिन पूर्व हरिद्वार के कनखल स्थित अपने पीठ में पहुँचे। जहाँ से शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कुम्भ छावनी के लिए प्रस्थान किया। शंकराचार्य के कुम्भ छावनी में प्रवेश के लिए सन्यासियों के अग्नि अखाड़े ओर ब्राह्मण सभा के श्री अखण्ड परशुराम अखाड़े ने एक मंगल यात्रा का आयोजन किया । यह मंगल यात्रा श्रीपरशुराम चौक से शुरू होकर शहर भ्रमण करते हुए शंकराचार्य के कुम्भ क्षेत्र में बने शिविर में पहुँची। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की मंगल यात्रा के संबंध मे उनके परम शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती।हरिद्वार पहुँचे है जहाँ उनका मंगल यात्रा के माध्यम से छावनी में प्रवेश हो रहा है उन्होंने बताया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती एक स्वतन्त्रता सेनानी भी रहे है। आज 97 साल की उम्र में भी उन्होंने तीर्थ में स्नान का क्रम नही छोड़ा है। उन्होंने कहा कि आज 97 साल की उम्र में भी एक वृद्ध संत गंगा स्नान कर सकता है तो फिर हम क्यों नही। इसलिए श्रद्धालुओं को कुम्भ में स्नान को बढ़ चढ़ कर आना चाहिए।उन्होंने कहा कि आज मंगल यात्रा के दौरान भी उनके द्वारा कोविड के नियमो का पालन किया गया इसलिए गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालु भी कोविड के नियमो का पालन करते हुए गंगा स्नान को आये।श्री अखण्ड परशुराम अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि आज निकाली गई यह मंगल यात्रा राष्ट्र और धर्म को मिलाकर निकाली गई मंगल यात्रा है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिये कोई भी हिन्दू युवक- युवती उनके अखाड़े में आकर तलवार, फरसा, या मुग़री चलाना सीखना चाहता है तो वे उसे निःशुल्क सिखाएंगे।

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