हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) देहरादून। भारत की सनातन परम्परा, ऋषियों द्वारा अपनाई गई जीवन शैली, प्रकृति का समादर तथा ऋतुओं का महत्व। इन सब का समावेश ही योग है। योग किसी क्रिया विशेष से सम्बंधित नही है। इसलिए अष्टांग योग मे यम, नियम, आसन तथा प्राणायाम का पालन करना अधिक आवश्यक बताया गया है। योग को ब्रहमचर्य की अवस्था से ही महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके माध्यम से जीवन की कठनाईयों पर जीत हासिल की जा सकती है। योग बच्चों में अधिक प्रभावी एवं सकारात्मक परिवर्तन करता है। जिससे एकाग्रता एवं लक्ष्य प्राप्ति में सहायता मिलती है। आज पढाई को लेकर बच्चों मे जिस प्रकार का तनाव तथा अवसाद उत्पन्न हो रहा है। उन सबका समाधान योग है। योग बच्चों के लिए ब्रहमास्त्र का काम करता है।
          देखें वीडियो: कक्षा 3 की छात्रा प्राणवी
इसी भाव को लेकर डालनवाला, दून इन्टरनेशनल स्कूल मे कक्षा 3 की छात्रा प्राणवी ने छठे अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अपने घर रहकर योग की  क्रियाये की। प्राणवी कहती हैै कि वे योग की क्रियाये रोज करती है क्योकि योग करना मुझे अच्छा लगता है। इससे करने के बाद मेरा पढाई मे जल्दी मन लगता है। योग करने के लिए वे घर के लोगों को भी जागरूक रखती है। योग दिवस के अवसर पर लोगों को जागरूक बनाने के लिए प्राणवी कहती है कि कुछ देर योग करने से पूरा दिन अच्छे से गुजरता है। और पढाई के साथ दूसरे कामों के भी मन लगता है।  इसलिए सब को मिलकर योग करना चाहिए।
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