हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। आज एक अजब संयोग है कि एक ओर हम सब स्वस्थ जीवन की संकल्पना लेकर योग करते हुए इसे जीवन का अंग बनाने की मुहिम मे लगे है वही स्वस्थ जीवन की कठिनाईयों को दूर करने वाले पिता के सम्मान दिवस के रूप में फादर-डे मनाकर पिता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे है। व्यक्ति के जीवन मे स्वस्थ्य एवं संतुलित जीवन यापन करना सबसे बडी चुनौती होता है ऐसा इसलिए क्योकि ये एक दोनो एक दूसरे के पूरक है। भौतिक युग मे स्वास्थ्य के साथ संतुलित रहना कठिन है। स्वास्थ्य का अभिप्राय शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य से है इसी प्रकार संतुलन का अर्थ शारीरिक तथा मानसिक क्रियाओं मे संतुलन बनाकर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना है। यौगिक क्रियाओं के माध्यम से शरीर को स्वस्थ्य रखने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। परन्तु मन की चंचलता के कारण उत्पन्न होने वाले कष्टों के साथ संतुलित रहना बडी चुनौती है। इसलिए योग के साथ हमे पिता के सम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए क्योकि जीवन के कठिनाई भरे दिनों मे उनकी उपस्थिति एक पथिक को पेड की छाया के समान होती है। यह छाया सभी के जीवन मे बनी रहे तथा हम जीवन के दोनो पक्षों के अनुभव लेकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके इसी का प्रयास करते रहना जरूरी है।



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