हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के 70 वर्षीय संत कल्पवृक्ष, उनके सहायक 35 वर्षीय सुशील गिरी और वाहन चालक नीलेश तेलगड़े के साथ अपने गुरु श्रीमहन्त रामगिरि के आकस्मिक देहावसान  मे शामिल होने मुम्बई से गुजरात के लिये निकले थे। महाराष्ट्र के जिला पालघर के थाना कासा क्षेत्र में लॉक डाउन होने के बावजूद वहां पहले से एकत्र 200 लोगो ने कार को पलट कर उसमे बैठे लोगों पर भी लाठी, डंडों, रॉड धारदार हथियारों से हमला किया।  वाहन पर पथराव भी किया गया। इस दौरान रात्रि 11 बजे वन विभाग के एक कर्मचारी ने थाना कासा को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने सन्तो और वाहन चालक को अपनी जीप में बैठाया, लेकिन उपद्रवियों की हिम्मत तो देखो पुलिस की मौजूदगी में ही तीनो को लाठी, डंडे, रॉड चाकू से हमला करके मार दिया गया। साथ ही उन उपद्रवियों ने उनके पचास हजार रुपये, भगवान जी की मूर्तियों के सोने के आभूषण भी लूट लिये गए। इस दर्दनाक घटना में वहां की पुलिस मूकदर्शक बनी रही इससे बहुत से सवाल उठते हैं। क्या उस जनपद और राज्य में अपराधियों के मन मे पुलिस प्रशासन का कोई ख़ौफ़ नही है? या वहां की पुलिस किसी भय, स्वार्थ, या राजनीति दबाव में कार्य करती हैं, विभिन्न राज्यो के सन्तो की देश के गृहमंत्री अमित शाह से पत्र लिखकर न्यायिक जांच की मांग की। सन्तो का कहना महंत प्रेमगिरि का कहना है कि पुलिस हिरासत में होने तक बावजूद कैसे उपद्रवी उन तीनों को मारने में सफल हो जाते हैं। पुलिस ने अपने हथियारों का इस्तेमाल करके उनकी रक्षा का प्रयास क्यो नही किया? हालाकि कासा पुलिस स्टेशन में घटना की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हो चुका है। मगर साधु संतों में इस घटना के कारण भारी आक्रोष व्याप्त हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस घटना की उच्चस्तरीय जांच करके न सिर्फ उपद्रवियों को कड़ी सजा और दोषी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर उनकी सेवाओ को समाप्त कर मुकदमा चलाने की मांग की हैं।
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