हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समय आध्यात्मिक बदलाव का महासमर है। इन दिनों स्थिर जगत से लेकर सूक्ष्म जगत में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। वे शांतिकुंज में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन के प्रथम सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस संगोष्ठी में गायत्री परिवार द्वारा संचालित जोनल केन्द्रों के पाँच सौ से अधिक नैष्ठिक कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे। गायत्री परिवार के जनक पूज्य आचार्यश्री के भविष्यवाणी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय में चल रही उथल-पुथल तूफानी झंझावतों के बीच शांतिकुंज में नवसृजन करने वाले व्यक्तित्वों को गढ़ा जा रहा है। जो समय आने पर अपने मूल कार्य नवसृजन के कार्य को पूरा करेगा। इस हेतु शांतिकुंज परिवार सामूहिक साधना के माध्यम से व्यक्ति निर्माण करने में जुटा है। संगोष्ठी के दूसरे दिन गायत्री परिवार द्वारा संचालित होने वाले वर्षभर की कार्य योजनाओं पर गहन मंथन किया गया। इसके अलावा गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ एवं उपासना, व्यक्तित्व विकास के सूत्र, युगधर्म का निर्वाह, साधनात्मक पुरुषार्थ, रचनात्मक केन्द्र के रूप में उभरे प्रज्ञा संस्थान आदि विषयों पर शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री केसरी कपिल, श्री कालीचरण शर्मा, श्री केपी दूबे, प्रो. प्रमोद भटनागर आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर देश भर के ज़ोन, उपज़ोन प्रभारियों के अलावा नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं सहित शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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