हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तर प्रदेश से पृथक राज्य बनाने हेतु उत्तराखंड बनाने में जो यहां के नागरिको ने जो खून देकर उत्तराखंड राज्य बनाया था उन्होंने सपने में भी नही सोचा होगा कि उत्तराखंड राज्य बनने का लाभ यहाँ के स्थानीय नागरिकों को नही बल्कि नेता लोग उठाया करेगे। कुछ ये ही दर्द महसूस कर रहे हैं यमकेश्वर प्रखण्ड के वो लोग जो आज अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा, रोजगार, और बीमार लोगो की चिकित्सा हेतु आज भी खून के आँशु रोने को विवश है। कहने को तो यमकेश्वर उस पौड़ी जनपद का विकासखंड है जो देहरादून जिले से सटा हुआ है। जिसकी सीमायें हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल और देहरादून से लगती है। लेकिन हकीकत में यह यमकेश्वर क्षेत्र विकास से कोसो दूर है। स्थानीय नागरिकों का राज्य सरकार पर आरोप हैं कि उत्तराखंड में सरकारे तो बदलती रहती हैं मगर यमकेश्वर क्षेत्र के बुरे हालात नही क्योंकि यहाँ की जनता को अभी तक सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाएं अभी तक नसीब नही हुई। यमकेश्वर के गाँव में सड़क नही होने से लोग मरीजों को कंधे में उठाकर मुख्य सड़क तक लाने को मजबूर है। ताजा मामला यमकेश्वर के ग्राम सभा व क्षेत्र पँचायत बूंगा का खंड गाँव वीरकाटल का है। यहाँ के निवासी नरेन्द्र सिंह रौथाण की तबियत अचानक ख़राब हो गयी तो उन्हें गाँव के निवासियों द्वारा कंधों में बिठाकर मुख्य सड़क मोहनचट्टी तक लाया गया। उसके बाद निजी वाहन की सहायता से एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया। नरेन्द्र रौथाण को कंधे पर गाँव के निवासी कमल, राजेश, मंजीत उपेंद्र, अर संजीव अन्य युवा वर्ग ऊँन्हे कंधो में बिठाकर मुख्य सड़क मार्ग तक लाये। इस बारे में सुदेश भट्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य बूंगा ने बताया कि क्षेत्र में सड़क नही होने से स्थानीय नागरिकों को प्रतिदिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बूंगा- रणखोली- वीरकाटल सड़क सालों पहले स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन आज तक विभागीय कागजो में धूल फांक रही है। यदि यह सड़क बन गयी होती तो आज नरेंद्र रौथाण को कंधे में बिठाकर ले जाने की नौबत नही आती। इसी तरह वीरकाटल गधेरे में बनी पुलिया 2014 में आपदा की भेंट चढ़ गया जो आज तक दोबारा नही बन पाया। उन्होंने यह भी बताया कि इस पुलिया में बिजली के पोल रखकर लोग जान जोखिम में डालकर उसके ऊपर चल रहे हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य सुदेश भट्ट ने कहा कि यदि शीघ्र ही इस विकट समस्या का समाधान नही हुवा तो राज्य सरकार को आने वाले चुनाव में जनता का भारी जन आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। यह तो बूंगा वीरकाटल सड़क तो एक उदाहरण ही है। ऐसे ना जाने कितने गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओ के अभाव में जीने को मजबूर हैं। समाजसेवी मनीषा वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार नरेन्द्र मोदी देश को विकसित करने में लगे हुवे हैं उनसे कुछ सीखते हुवे डबल इंजन वाली त्रिवेंद्र सरकार को यमकेश्वर क्षेत्रवासियों का दर्द समझने हेतु उनके स्थाई समाधान हेतु गम्भीर होना चाहिए।



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