हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है सभी जानते हैं कि कलम की ताकत तलवार से ज्यादा होती है देश निर्माण में इस ताकत का प्रयोग यह स्तंभ बेखौफ होकर निभाता है तथा चौथे स्तंभ पत्रकारिता की भूमिका के अंतर्गत न केवल राष्ट्र के समक्ष उपस्थित समस्याओं का समाधान खोजना शामिल है, बल्कि लोगों को शिक्षित तथा सूचित भी करना होता है ताकि लोगों में समालोचनात्मक जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता, पत्रकार निस्वार्थ भाव से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओ को प्रचार-प्रसार के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का कार्य करता है तथा जनता का आईना बंनकर उनकी समस्याओं से शासन प्रशासन को अवगत भी कराता है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि पत्रकारों के खिलाफ षड्यंत्र के तहत कार्य किए जा रहे हैं जिसके चलते पत्रकारों पर हमले, षड्यंत्र के तहत मुकदमे, उनका शोषण यहां तक उनकी हत्या आम बात हो गई हैं, पत्रकारों पर आये दिन हो रहे हमले इस देश को शायद गर्त की तरफ धकेलने का कार्य कर रहे हैं, इस बात को हम झुठला नहीं सकते कि अगर ऐसे ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का शोषण होता रहा तो एक दिन लोकतंत्र खतरे में होगा, साथ ही अत्याचार और भ्रष्टाचार बहुत आसानी से फल फूल रहा होगा, वहीं वेब न्यूज़ पोर्टल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विकास गर्ग ने पत्रकारों के हित तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रखी है, उन्होंने उत्तराखंड सरकार से कुछ बिंदुओं के साथ अपनी मांगे रखी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास गर्ग ने इन मांगों को साझा करते हुए कहा “पत्रकार हितों के लिए अब चल पड़े हैं हम। पत्रकारों की यह मांगे नहीं हो जाती पूरी। ना रुकेंगे कदम, ना लेंगे हम बिल्कुल भी दम। सुनिए साहब पत्रकार कोई भीड़ का हिस्सा नहीं चौथा स्तंभ कहे जाना वाला पत्रकार आज किस स्थिति से गुजर रहा है यह अब सरकार को देखना होगा सोचना होगा पत्रकार के लिए समझना होगा अब पत्रकार नहीं रहेगा चुप पत्रकारों की यह मांगे पूरी करो पूरी करो।
पत्रकारों की प्रमुख मांगें:
1- पत्रकारों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान हो।
2- पत्रकारों के परिवारों को निशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
3- आवास हीन पत्रकारों के लिए निशुल्क पत्रकार आवासीय कॉलोनियों की स्थापना की जाए।
4- पत्रकारों पर जगह जगह हो रहे फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं।
5- पत्रकारों पर जगह-जगह हो रहे हमलों के मामले में तुरंत कार्यवाही हो और आरोपियों को गिरफ्तार कर तुरंत जेल भेजा जाए।
6- मृतक पत्रकार के परिजनों का रोजी रोटी बड़ी समस्या सरकार करें ₹15000 महीना पेंशन की व्यवस्था उचित व्यवस्था
7- पत्रकार सुरक्षा विधेयक लाया जाए।
8- पत्रकारों की दशा सुधारने के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए।
9- लघु एवं मध्यम दर्जे के समाचार पत्रों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए जिससे लघु एवं मध्यम दर्जे के समाचार पत्र पत्रिकाओं आदि की दशा को सुधारा जा सके।
10- समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों को सहयोग न करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाए।
11- पत्रकारों को मासिक भत्ता लागू किया जाए।
12- पत्रकारों से टोल टैक्स माफ किया जाए।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours