हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। अन्नदाता कहां जाने वाला किसान आज भुखमरी की कतार पर खड़ा होकर खून के आंसू रोने को मजबूर है कृषि प्रधान देश में किसानो को अपना जीवन व्यापन करने के लिए भी बेहद संघर्ष करना पड़ रहा है रात दिन मेहनत कर अपने खेतों से फसलों को उगाने वाले किसानों को फसलों का भी मेहनताना नहीं मिल रहा है। सरकार की कूट नीतियों के कारण खेती किसानो को के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है वही ताजा मामला बहादराबाद ब्लॉक के मानुबास गांव का है मानुबास गांव क्षेत्र में ज्यादा कर मजदूर किसान लोग ही निवास करते हैं किसान सुहैल और कमरपाल का कहना है कि दिन रात अपने खेतों से मेहनत कर साग सब्जी उगाते हैं लेकिन जो सब्जियों में हमारी मेहनत और लागत आती है।
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उसका सही मूल्य हमें नहीं मिल पाता है उन्होंने बताया कि सब्जी के खेतों में जंगली जानवरों का भी बहुत ज्यादा खतरा रहता है लगातार जंगली जानवर फसलों को उजाड़ते रहतेे हैं जिस कारण सब्जियों की खेती में हमें घाटा ही घाटा हो रहा है उन्होंने बताया कि अन्य कारोबार ना होने के कारण मजबूरन हमें खेती का ही काम करना पड़ रहा है सरकार की ओर से भी किसी तरह का मुआवजा या राहत नहीं मिलती है जिससे बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ घरेलू व्यापन करने वाली सामग्री के भी घरों में लाले हो जाते हैं वही किसानों ने सरकार से मांग की है कि सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील होकर खाद, पानी, कीटनाशक दवाई और खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को बहुत ही कम कीमत दरो पर उपलब्ध कराएं। जिससे किसानों को कुछ ना कुछ राहत मिल सके।
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