हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जनपद हरिद्वार में पशु चिकित्सालय विभाग की घोर लापरवाही रुकने का नाम नहीं ले रही है विभाग का एक के बाद एक नया मामला सामने आ रहा है ताजा मामला बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत मानूबास गांव का है जहां लगभग 25 वर्ष पहले लाखों की लागत से पशु चिकित्सालय भवन का निर्माण हुआ था लेकिन एक डॉक्टर के लटायर होने के बाद आज तक कोई भी डॉक्टर पशु भवन में उपस्थित नहीं हुआ है पशु भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है भवन परिषद में बड़ी-बड़ी घास के साथ-साथ गंदगी के अंबार भी लगे हुए हैं लेकिन पशु चिकित्सालय विभाग की कुंभकरण की नींद टूटनेे का नाम नहीं ले रही है जिससे ग्रामीणों में शासन प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश पनप रहा है ग्राम वासियों ने पशु भवन पर इकट्ठा होकर शासन प्रशासन के विरोध जबरदस्त धरना प्रदर्शन भी किया।
वही ग्रामवासी बिरमपाल कश्यप, सबदर अली, मोहम्मद अजरम, मेहरबान, यासीन, सलमान, मुस्लिम, मांगेराम, इस्लाम आदि ने चिकित्सालय विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से बनें पशु भवन में डॉक्टरों की अब तक उपस्थिति नहीं हो पाई है ग्राम वासियों को अपने पशुओं को लेकर इधर उधर भटकना पड़ रहा है उन्होंने बताया कि बीमार पशुओं को प्राइवेट डॉक्टरों को दिखाने को मजबूर होना पड़ रहा है पशु विभाग की अनदेखी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। आपको बता देगी कि मानुबास गांव में पशु चिकित्सालय भवन का यह पहला मामला नहीं है रुड़की ब्लॉक के मरगुबपुर गांव का पशु चिकित्सालय भवन भी विभाग की लापरवाही के कारण खंडहर में तब्दील हो चुका है वहां भी कई वर्षों से डॉक्टर उपस्थित नहीं हुए हैं।
जिस कारण ग्रामवासी अपने पशुओं को प्राइवेट डॉक्टरों को दिखाने को मजबूर है प्राइवेट डॉक्टर भी फायदा उठाकर अपनी मनमर्जी के ग्राम वासियों से पैसे वसूलते हैं सरकार गांव में विकास करने के दावे तो करती है लेकिन कोई भी दावा धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है सरकार की सुस्ती ग्राम वासियों और किसानों पर भारी पड़ रही है वही विभागीय अधिकारी सरकारी सुविधाओं का लाभ तो उठा रहे हैं लेकिन अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर नहीं है सरकार की उदासीनता के कारण अधिकारी कर्मचारी बेखौफ होकर सरकार के दावों की धज्जियां उड़ाने में लगे हुए हैं। अब देखना होगा कि शासन प्रशासन पशु चिकित्सालय विभाग पर किस तरह की कार्रवाई अमल में लाता है या मामले की लीला पोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।





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