हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार के बहादरपुर जट गाँव की रामलीला में रावण-अंगद संवाद का दृश्य दिखा गया। श्री रामचंद्र जी ने सुग्रीव से सहमति लेकर अंगद को दूत के रूप में लंका भेजा और युद्ध को रोकने की कोशिश की, अंगद ने रावण के दरबार में जाकर रावण को समझाने का प्रयत्न किया। किंतु रावण ने अंगद की एक बात नहीं मानी इसके बाद अंगद ने अपनी शक्ति का परिचय देने के लिए अपना पांव जमीन पर जमा दिया। रावण का कोई भी सिपहसालार अंगद के पांव को नहीं हिला पाया। अंत में रावण ने अंगद के पैर को उठाने की कोशिश की इस पर अंगद ने कहा कि मेरे मत पकड़ो श्री रामचंद्र जी के पैर पकड़ने चाहिए। जिसके बाद अंगद वापस लौट आए और श्री रामचंद्र जी ने लंका पर चढ़ाई कर दी मंच का संचालन निर्देशक धर्मेंद्र सिंह चौहान और जीवेंद्र तोमर में किया। रावण का अभिनय ललित चौधरी, अंगद का अभिनय दीपक पाल, राम का अभीनय कृष्ण पाल, लक्ष्मण का अभिनय पुष्पेंद्र उर्फ काला, हनुमान का अभिनय पाले प्रजापति, विभीषण का अभिनय अजमेर कश्यप, मंत्री का अभिनय अमित सैनी ने और सुख सारण का अभिनय रमेश कुमार ने किया।



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