हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। जहाँ हरिद्वार का नाम लेते ही मन में एक धार्मिकता का सृजन होता है, वही आज हरिद्वार अपनी पवित्रता खोता जा रहा है, उसका कारण सिर्फ और सिर्फ लोगो में बढ़ रही व्यसन की आदत और प्रशासन की अपने कर्तव्य से विमुखता का होना है, नगर के स्थानीय निवासियों के मुताबिक पूरे हरिद्वार में अवैध शराब का कारोबार बड़े धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, जिसका पूरा-पूरा श्रेय हरिद्वार नगर प्रशासन को जाता है, हरिद्वार का ड्राई जॉन शाम ढलते ही शराब का व्यापारी बन जाता है, हरिद्वार के सबसे पवित्र क्षेत्र हर की पौड़ी से लेकर ब्रह्मपुरी, रामलीला ग्राउंड, ललतारो पुल, देवपुरा व रानीपुर मोड़ जहाँ अवैध शराब का कारोबार सूर्य छिपते ही विकराल रूप धारण कर लेता है, और हर तरफ पूरे क्षेत्र में शराब माफियां गिरोह के सदस्य सक्रिय हो जाते है, सबसे बड़ी बात ये है, कि रानीपुर मोड पर जहाँ लोगो की आवाजाही लगी रहती है, और दिन रात में कई अधिकारी व राजनीतिक दल के नेता का आवागमन रहता है, वही पर अवैध शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है, हर जगह शराबियों के अड्डे दिखाई देते है व पूरे क्षेत्र में शराबियों का बोलबाला रहता है, पुलिस की (24*7) निगरानी मे भी यह अवैध शराब कारोबार दिन-दुगूनी रात चोगुनी वृद्धि कर रहा है, इस शराब कारोबार के व्याप्कता सीधा पुलिस प्रशासन की मिली भगत के ही संकेत है, नगर के स्थानीय निवासियों ने भी इस सम्बंध में कई बार पुलिस प्रशासन को अवगत कराया, परन्तु प्रसाशन कोई कार्यवाही करने को ही तैयार नही है, पुलिस की इस गैर जिम्मेदाराना फितरत के तार राजनीतिक हस्तियों से जुड़े होने की भी सम्भावना है, पूरे उतराखण्ड में शराब तस्करी का कारोबार हमारी सरकार के राजनीतिक घराने ही चला रहे है, सिर्फ और सिर्फ यही कारण पुलिस प्रशासन को कार्यवाही से रोक सकता है, पुलिस प्रशासन शहर मे लॉ एण्ड ओर्डर को बनाये रखने में बार-बार क्यूं नाकाम हो रही है, कही पुलिस प्रशासन अवैध शराब कारोबारियों से मिलकर अपना व्यकितगत फायदें के चक्कर में वर्दी की आबरू तो नही लुटा रही, कुछ क्षेत्र के सक्रिय राजनेता भी अपने व्यक्तिगत लाभ के लिये इस अवैध शराब के कारोबार को बढाने में लगे है, और इस धर्म नगरी की पवित्रता को धूमिल कर रहे है, अगर इस पर जल्द ही रोक नही लगाई गई, और समय रहते प्रशासन ने अपने कर्तव्य का संज्ञान न लिया तो पूरी धर्म नगरी की पवित्रता तार-तार होते देर नही लगेगी, और पूरे देश मे ही नही विश्व मे धार्मिक नगरी की छवि का बुरा संदेश जायेगा, शासन प्रशासन के उच्च मंत्रागणो और अधिकारी गणों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि धर्म नगरी की इज्जत तार-तार होने से बच सके।



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