हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। नवरात्रों के दौरान को हमेशा से मीट बंद होता चला आ रहा है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा वर्तमान समय मे उपनगरी ज्वालापुर मे सम्पूर्ण मीट को बंद करा दिया गया है, और बंद कराने मे माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के उस आदेश का हवाला दिया गया है, जो कस्बा मंग्लोर के स्लेटर हाऊस से सम्बंधित था, ठीक है, यदि माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल का कोई आदेश मीट को बंद कराने के सम्बंध मे था, उस पर जिला प्रशासन ने अमल किया तो माननीय उच्च न्यायालय के ओर भी बहुत जनहित के आदेश राज्य सरकार और जिला प्रशासन को दे रखे है,
जिसमे मीट के सम्बंध मे भी माननीय न्यायालय ने आदेश दिया था, कि खाने और पीने की आजादी भारत के प्रत्येक नागरिक को है, जो चाहे खाना चाहे खाये यह उनका अधिकार है, इसलिए राज्य सरकार मीट खाने वाले लोगो के लिए वैध तरीके से स्लेटर हाऊस का प्रबंध करे ताकि मीट के इच्छुक लोग मीट खा सके और जो लोग मीट के कारोबार से जुडे हुए है, वो मीट का कारोबार स्लेटर हाऊस के माध्यम से कर सके, जिसे मीट खाने वालो को मीट मिले और जिनका मीट का कारोबार है, वो अपने कारोबार को वैध तरीके से संचालित कर अपने परिवार और बच्चों का लालन पालन कर सके, राज्य सरकार और जिला प्रशासन नगर निगम खाद सुरक्षा विभाग को माननीय न्यायालय के स्लेटर हाऊस बनाने वाले आदेश पर भी तो अमल करना चाहिए था, यकायक जिला प्रशासन द्वारा मीट बंदी के उस आदेश पर अमल कर लिया जिसके कारोबार से हजारो लोग और परिवार जुडे हुए है, इन परिवारो की रोजी रोटी और बच्चों की शिक्षा इसी कारोबार से जुडी हुई है, जिला प्रशासन द्वारा ऐसा नही करना चाहिए था, इसी समस्या को लेकर प्रसिद्ध आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार द्वारा एक प्रार्थना पत्र महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय नैनीताल, माननीय मुख्यमंत्री महोदय, मुख्य सचिव, जिलाधिकारी महोदय हरिद्वार, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी हरिद्वार, मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार को लिखा गया है, कि मीट के कारोबार को वैध तरीके से स्लेटर हाऊस उपलब्ध कराया जाये, तथा जब तक स्लेटर हाऊस की कार्यवाही अमल मे लाई जाये, तब तक पूर्व की भाति स्वच्छता के साथ अस्थायी रूप मे मीट का कारोबार करने की अनुमति प्रदान कराये ताकि हरिद्वार के हजारों लोग और उनके परिवार भूखे से ना मरे।




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