हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के युवाओं एवं शिक्षक, शिक्षिकाओं पर अन्य पदाधिकारियों ने नवरात्र साधना का सामूहिक जप, स्वाध्याय के क्रम को ‘इदं न मम्’ के भाव से पूर्णाहुति कर समापन किया। वहीं शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्त्ताओं एवं देश-विदेश से आये साधकों ने भी 27 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में अपने अनुष्ठान की पूर्णाहुति की। इसके पश्चात कन्या भोज एवं प्रसाद वितरण किया गया। पूर्णाहुति से पूर्व देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने नवरात्र साधना की अंतिम कक्षा ली। इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने गीता के चौथे अध्याय के 31वें श्लोक व्याख्या करते हुए कहा कि मनोयोगपूर्वक की गयी नवरात्र साधना से साधक पवित्रता की ओर अग्रसर होने लगता है। उनके मन में अनासक्ति का भाव जागता है और उनमें अहंकार का भाव कम होता है। साधक में भाव संवेदना का जागरण होता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ साधक के जीवन को ऊँचा उठाता है। यज्ञ करने से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है। यज्ञ से भौतिक, आध्यात्मिक लाभ मिलता है। भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना है, इसमें यज्ञ की विशेष आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मिट्टी में मिला अन्नकण सौ गुना हो जाता है, उसी प्रकार अग्नि से मिला पदार्थ लाख गुना हो जाता है। अग्नि के संपर्क में कोई भी द्रव्य आने पर वह सूक्ष्मीभूत होकर पूरे वातावरण में फैल जाता है और अपने सद्गुण से लोगों को प्रभावित करता है। गीता मर्मज्ञ डॉ. पण्ड्या ने कहा कि गीता में भगवान् श्रीकृष्ण ने भी विशेष महत्ता बताई है। उन्होंने विभिन्न आर्षग्रंथों के उदाहरण के साथ नवरात्र साधना, यज्ञ की महत्ता एवं वैज्ञानिक आधार पर विस्तृत विवेचन किया। इससे पूर्व कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने ‘यज्ञ रूप प्रभो हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए ..’ प्रज्ञागीत का वांसुरी, वायलिन, सितार आदि वाद्ययंत्रों के साथ गाकर उपस्थित साधकों को उल्लसित कर दिया। इस अवसर पर देसंविवि परिवार, शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्ता एवं देश-विदेश से आये गायत्री साधक उपस्थित रहे। उधर शांतिकुंज के मुख्य सभागार में वरिष्ठ प्रतिनिधि केसरी कपिल जी ने नवरात्र साधकों को विदाई संदेश देते हुए नवरात्र साधना से प्राप्त ऊर्जा, अनुदान को समाजहित में लगाने के लिए प्रेरित किया। इससे पूर्व शांतिकुंज ब्रह्मवादिनी बहिनों द्वारा संचालित 27 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में साधकों ने ‘इदं न मम्’ के भाव से पूर्णाहुति की एवं अर्जित ऊर्जा को समाज के विकास एवं युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में लगाने हेतु संकल्पित हुए। झारखण्ड के पूर्व विधायक श्री खीरू महतो का कहना है कि मुझे कई बार शांतिकुंज में नवरात्र साधना करने का अवसर मिला, किन्तु इस बार जो मुझे मिला, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours