हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। सीपीयू सभी वाहन चालको से यही अपेक्षा करती है कि वो वाहन चलाते समय दुसरो के लिये नही तो कम से कम अपने परिवार के लिये सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाये। बाइक पर तीन सवारी बैठाने से परहेज करें, जैसे कि आज प्रेमनगर आश्रम चौक पर बाईक पर एक आदमी ने बाइक पर आगे बच्चा बैठा रखा था, पीछे दो दो महिलाओं को बैठा रखा था। चूंकि अक्सर महिलाएं चिकने कपड़े, बुर्का, साहडी आदि पहनकर एक ही साइड पैर करके बैठती है। उसे बाइक चलाने वाले का संतुलन बिगड़ने के चांस ज्यादा रहते हैं।  हमारी सड़के भी कम जोखिम भरी नही होती कही अनावश्यक स्पीड ब्रेकर तो कही गड्ढे। उसी के कारण सबसे पीछे बैठी महिला नीचे गिरी, गिरते समय उसने आगे बैठी महिला को पकड़ लिया तो वो भी बाइक से नीचे फिसल गई। दोनो ही महिला के काफी दूर तक फिसलने के कारण मुँह और अन्य जगहों पर चोट भी लग गयी। अक्सर हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कुछ पैसे बचाने के लिये हम जोखिम उठाने में परहेज नही करते जिसके कारण सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ सीपीयू वालो की लाख कोशिशों के बावजूद कम नही हो पा रहा है। सभी को पता है हेलमेट लगाने से हानि कुछ नही लाभ ही लाभ है, फिर भी कही पत्रकार होने का, कभी स्टाफ होने का तो कभी "भैय्या मेरा घर यही है, मुझे तो सिर्फ दुकान तक जाना था" आदि आदि बहाने लगाकर चालान कटवाने से बचते हैं। वो भूल जाते हैं कि जिस दिन उनका यमराज ने चालान काट दिया उस दिन घर वापसी के भी चांस नही रहेगे। सबसे बड़ी गैर जिम्मेदारी वाली बात सरकारी वाहन चालक भी सीट बेल्ट लगाने से बचते देखे जाते हैं, उन्हें लगता है कि स्टाफ होने के कारण उनका कौन चालान काट सकता है? प्रशंसनीय बात ये रही कि जिलाधिकारी दीपक रावत के ड्राइवर को सीट बेल्ट बांधकर वाहन चलाते देखकर शकुन मिला। सरकार को भी देखने की जरूरत है कि सिर्फ चालान काटने से यातायात के नियमो की धज्जियां उड़ाने वालो पर कोई विशेष फर्क नही पड़ने वाला। जिस गति से प्रति वर्ष सड़को पर वाहनो की संख्या लगातार बढ़ने पर है उस अनुपात में यातायात के नियमो की धज्जियां उड़ाने वालो के लाइसेंस मात्र 3 महीने नही कम से कम 1 साल के लिये रद्द होने समय की मांग है। सीपीयू वालो को भी चाहिए कि वो उन लोगो की मानसिकता के विरूद्ध कार्य करे जिनको लगता है कि स्टाफ, पत्रकार, वकील, नेता आदि होने के कारण उनका कौन चालान काट सकता है। यदि सीपीयू जनता से बिना किसी भेदभाव के चालान काटे तो सीपीयू का शहर में मुश्किल ही कोई विरोध करेगा।
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