हरिद्वार की गूंज (24*7)
पिछले काफी समय से जरूरत महसूस की जा रही थी कि हमारी मित्र पुलिस न सिर्फ एक जगह बैठकर हेलमेट चालान काटने तक सीमित रहे बल्कि शहर में घूम घूम कर सड़को पर असामाजिक तत्वो पर भी आवश्यक कार्यवाही करें। इसकी जरूरत को एसआई नागेन्द्र घड़ियाल ने न सिर्फ इसे जरूरी समझा साथ ही सड़क पर संदिग्ध दिखने वाले कुछ युवकों के चालान भी काटे। इस विषय में सब इंस्पेक्टर नागेन्द्र ने हरिद्वार की गूंज के माध्यम से जनता को सन्देश दिया कि न सिर्फ चेतक के द्वारा बल्कि वो स्वयं भी सड़को पर घूमने वाले संदिग्धों पर तेज निगाहे रखेगे।
दूसरे पहलू की फ़ोटो
अब सिक्के के दूसरे पहलू की बात करे तो वही एक अन्य कॉन्स्टेबल ऐसा भी पाया गया जो ड्यूटी के समय मोबाइल में वाटसअप या फेसबुक पर व्यस्त दिखाई दिया। सड़को पर बनी हुई अनेको पुलिस चौकीयो के माध्यम से यदि अपराधियो पर अंकुश लगाना है तो उसके लिये ऐसे सिपाही बड़े महत्त्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, बेशर्ते प्रत्येक सिपाही फिर चाहे वो होमगार्ड हो, पीआरडी के जवान हो, या फिर कॉन्स्टेबल वो खुद को एन एस जी कमांडो की तरह चौकन्ना रहना होगा। वो खुद को सोशल मीडिया की अपेक्षा आने जाने वालों पर चौकन्ने रहकर पुलिस चौकियों से अपना बेहतर तालमेल बनाये। माना कि सभी वाहन चालकों या राहगीरों पर निगाह रखना, तलाशी लेना सम्भव नही तो जो वाहन चालक या राहगीर सन्दिग्ध दिखाई दे तो कम से कम उनकी सूचना तो चौकी इंचार्ज तक शेयर करे तो बहुत कुछ हो भी सकता है। लीक से हटकर सफलता लेने हेतु पुलिस अधिकारियों को लीक से हटकर कार्यशैली बनानी ही पड़ेगी। इन पुलिस चौकियों का इस्तेमाल सिर्फ हेलमेट चैकिंग तक सीमित होना विभाग की सुस्त कार्यशैली को दर्शाता है।
पिछले काफी समय से जरूरत महसूस की जा रही थी कि हमारी मित्र पुलिस न सिर्फ एक जगह बैठकर हेलमेट चालान काटने तक सीमित रहे बल्कि शहर में घूम घूम कर सड़को पर असामाजिक तत्वो पर भी आवश्यक कार्यवाही करें। इसकी जरूरत को एसआई नागेन्द्र घड़ियाल ने न सिर्फ इसे जरूरी समझा साथ ही सड़क पर संदिग्ध दिखने वाले कुछ युवकों के चालान भी काटे। इस विषय में सब इंस्पेक्टर नागेन्द्र ने हरिद्वार की गूंज के माध्यम से जनता को सन्देश दिया कि न सिर्फ चेतक के द्वारा बल्कि वो स्वयं भी सड़को पर घूमने वाले संदिग्धों पर तेज निगाहे रखेगे।
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अब सिक्के के दूसरे पहलू की बात करे तो वही एक अन्य कॉन्स्टेबल ऐसा भी पाया गया जो ड्यूटी के समय मोबाइल में वाटसअप या फेसबुक पर व्यस्त दिखाई दिया। सड़को पर बनी हुई अनेको पुलिस चौकीयो के माध्यम से यदि अपराधियो पर अंकुश लगाना है तो उसके लिये ऐसे सिपाही बड़े महत्त्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, बेशर्ते प्रत्येक सिपाही फिर चाहे वो होमगार्ड हो, पीआरडी के जवान हो, या फिर कॉन्स्टेबल वो खुद को एन एस जी कमांडो की तरह चौकन्ना रहना होगा। वो खुद को सोशल मीडिया की अपेक्षा आने जाने वालों पर चौकन्ने रहकर पुलिस चौकियों से अपना बेहतर तालमेल बनाये। माना कि सभी वाहन चालकों या राहगीरों पर निगाह रखना, तलाशी लेना सम्भव नही तो जो वाहन चालक या राहगीर सन्दिग्ध दिखाई दे तो कम से कम उनकी सूचना तो चौकी इंचार्ज तक शेयर करे तो बहुत कुछ हो भी सकता है। लीक से हटकर सफलता लेने हेतु पुलिस अधिकारियों को लीक से हटकर कार्यशैली बनानी ही पड़ेगी। इन पुलिस चौकियों का इस्तेमाल सिर्फ हेलमेट चैकिंग तक सीमित होना विभाग की सुस्त कार्यशैली को दर्शाता है।




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