हरिद्वार की गूंज (24*7)
(विभास सिन्हा) हरिद्वार। शांतिकुंज द्वारा संचालित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव का कुलपति श्री शरद पारधी व प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या सपत्नीक ने शिवाभिषेक कर कल्याणकारी चिंतन एवं राष्ट्र की विकास हेतु कामना की। रसिया, अमेरिका, यूके, आस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों से आये अतिथियों एवं गायत्री परिवार के हजारों शिवभक्तों के प्रतिनिधि के रूप में दोनों ने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राष्टकम्, महाकालाष्टकम, पुरुष सूक्त व अन्य वैदिक कर्मकांड के साथ पूजन सम्पन्न किया। इस अवसर पर देसंविवि एवं शांतिकुंज परिवार उपस्थित रहे। इस मौके पर देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शिव की साधना के नाम पर ही लोग अशिव आचरण करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर सामूहिक पर्वायोजन के माध्यम से फैली हुई भ्रांतियों का निवारण करते हुए शिव की गरिमा के अनुरूप उसके स्वरूप पर जन आस्थाएँ स्थापित की जानी चाहिए, ताकि सामूहिक एवं व्यक्तिगत रूप से पुण्य अर्जन और समाज कल्याण की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि स्वयं कम से कम साधनों से काम चलाते हुए दूसरों को बहुमूल्य उपहार देना एवं ऐसे कृत्यों से मन को प्रफुल्लित रखे रहना शिव के प्रधान गुण हैं। पुरुष सुक्त के साथ रुद्राभिषेक का कर्मकाण्ड पं शिवप्रसाद मिश्रा एवं उनकी टीम ने किया। संगीत विभाग के भाइयों ने सुमधुर शिव आराधना से सम्पूर्ण परिसर को मंत्रमुग्ध कर दिया, तो वहीं सितार, शंख व डमरू की झंकार ने लोगों के अंदर के तार को झूमने के लिए उल्लसित किया। उधर शांतिकुंज के मुख्य सभागार में महिला मण्डल के नेतृत्व में भव्य दीपयज्ञ सम्पन्न हुआ। इसमें सैकड़ों लोगों ने अपने अंदर की एक बुराई छोड़ने एवं शिवत्व की ओर बढ़ने के लिए एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प लिया।
(विभास सिन्हा) हरिद्वार। शांतिकुंज द्वारा संचालित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव का कुलपति श्री शरद पारधी व प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या सपत्नीक ने शिवाभिषेक कर कल्याणकारी चिंतन एवं राष्ट्र की विकास हेतु कामना की। रसिया, अमेरिका, यूके, आस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों से आये अतिथियों एवं गायत्री परिवार के हजारों शिवभक्तों के प्रतिनिधि के रूप में दोनों ने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राष्टकम्, महाकालाष्टकम, पुरुष सूक्त व अन्य वैदिक कर्मकांड के साथ पूजन सम्पन्न किया। इस अवसर पर देसंविवि एवं शांतिकुंज परिवार उपस्थित रहे। इस मौके पर देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शिव की साधना के नाम पर ही लोग अशिव आचरण करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर सामूहिक पर्वायोजन के माध्यम से फैली हुई भ्रांतियों का निवारण करते हुए शिव की गरिमा के अनुरूप उसके स्वरूप पर जन आस्थाएँ स्थापित की जानी चाहिए, ताकि सामूहिक एवं व्यक्तिगत रूप से पुण्य अर्जन और समाज कल्याण की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि स्वयं कम से कम साधनों से काम चलाते हुए दूसरों को बहुमूल्य उपहार देना एवं ऐसे कृत्यों से मन को प्रफुल्लित रखे रहना शिव के प्रधान गुण हैं। पुरुष सुक्त के साथ रुद्राभिषेक का कर्मकाण्ड पं शिवप्रसाद मिश्रा एवं उनकी टीम ने किया। संगीत विभाग के भाइयों ने सुमधुर शिव आराधना से सम्पूर्ण परिसर को मंत्रमुग्ध कर दिया, तो वहीं सितार, शंख व डमरू की झंकार ने लोगों के अंदर के तार को झूमने के लिए उल्लसित किया। उधर शांतिकुंज के मुख्य सभागार में महिला मण्डल के नेतृत्व में भव्य दीपयज्ञ सम्पन्न हुआ। इसमें सैकड़ों लोगों ने अपने अंदर की एक बुराई छोड़ने एवं शिवत्व की ओर बढ़ने के लिए एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प लिया।



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