हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मुकेश राणा) हरिद्वार। इन दिनो विशेष चर्चा का विषय बनी जहरीली शराब प्रत्येक व्यक्ति की जुबान पर है और जब बार बार जहर चर्चा का विषय बने तो अवस्य ही जहर के कहर से बचना मुस्किल हो जाता है शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर ने जहर पिया था परन्तु समस्या यह है कि जहर पिया गया या पिलाया गया दोनो बातों पर गौर करने की बात है वैसे भगवान शंकर को देवताओं ने इसलिए पिलाया था ताकि वह कालकूट विष पृथ्वी क्या तीनों लोकों का विनाश करने हेतु पर्याप्त था लेकिन शंकर पी गए वह भी लोक कल्याण की दृष्टि से लेकिन वे देवता थे हम आप इंसान है जो एक दूसरे के ही दुष्मन है यह जहरीली शराब का उत्पादन अभी हुआ या यह पहले से ही हमारी इंसानियत के साथ खिलवाड़ करने के लिए हमारे आस पास जाल फैला हुआ था, और हम बेफिक्र थे या फिर सब कुछ जानकारी थी गौर करें यह हादसा होते ही 6 पुलिस जवानो व संबधित हल्के के पुलिस अधिकारियों को सस्पैंड कर उ. प्र प्रसाशन ने मजिस्ट्रेट जॉच के आदेश देते हुए करीब 36 लोगो के विरूद्ध मुकदमें की कार्यवाही कर यह साबित कर दिया कि उन्हे पहले से घटना की भनक होती तो हादसा होना नामुमकिन था इतना ही नहीं वल्कि डीजीपी को भेजी गयी रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जहरीली शराब रूढ़की के पास एक गाँव से  सहारनपुर पहुँची है अब यदि उत्तराखंड की क्रियाशीलता का गहन अध्यन करें तो जहाँ भी हादसा हुआ जहाँ शराब की भट्टियाँ पकड़ी गई वहाँ संम्बधित पुलिस या आबकारी विभाग के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई माननीय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने हरिद्वार जनपद के संम्बध में आबकारी मंत्री से रिपोर्ट तलब क्यों नहीं की।
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