हरिद्वार की गूंज
(रजत चौहान प्रधान सम्पादक) हरिद्वार। देश भर में पत्रकारों को अपना काम करने देने से रोकने का एक पैटर्न स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आ चुका है। आप अगर खोजी पत्रकारिता कर के कोई हकीकत सामने लाते हैं, तो आप पर मुकदमा हो सकता है। मुकदमा करने वाला कोई भी हो सकता है- जिसके खिलाफ स्टोरी है वो या उसका कोई शुभचिंतक।
"प्रेस को पूरी आज़ादी होनी चाहिए, ग़लत रिपोर्टिंग पर मानहानि के शिकंजे में न घेरें’
हाल ही में हरिद्वार जिले के ईटीवी के एक पत्रकार पर शराब की खबर प्रकाशित होने के बाद शराब माफियाओ ने पत्रकार पर मुकदमे में फंसा देने के साजिस रच दी। जिसमे स्थानीय पत्रकारों में काफी रोष है।
पत्रकरो को लिखने की हो आजादी
कुछ समय पहले उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की है कि प्रेस के बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी पूर्ण होनी चाहिए और कुछ ग़लत रिपोर्टिंग होने पर मीडिया को मानहानि के लिए नहीं पकड़ा जाना चाहिए।
यह भी है
एक मामले में रहमत फ़ातिमा अमानुल्लाह ने एक ख़बर की ग़लत रिपोर्टिंग प्रसारित करने के लिए एक पत्रकार के ख़िलाफ़ निजी मानहानि की शिकायत निरस्त करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।
क्या आपको ये रिपोर्ट पसंद आई
हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं. हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।
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हाल ही में हरिद्वार जिले के ईटीवी के एक पत्रकार पर शराब की खबर प्रकाशित होने के बाद शराब माफियाओ ने पत्रकार पर मुकदमे में फंसा देने के साजिस रच दी। जिसमे स्थानीय पत्रकारों में काफी रोष है।
पत्रकरो को लिखने की हो आजादी
कुछ समय पहले उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की है कि प्रेस के बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी पूर्ण होनी चाहिए और कुछ ग़लत रिपोर्टिंग होने पर मीडिया को मानहानि के लिए नहीं पकड़ा जाना चाहिए।
यह भी है
एक मामले में रहमत फ़ातिमा अमानुल्लाह ने एक ख़बर की ग़लत रिपोर्टिंग प्रसारित करने के लिए एक पत्रकार के ख़िलाफ़ निजी मानहानि की शिकायत निरस्त करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।
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