हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। 16 अगस्त से लेकर अब तक सीपीयू और पुलिस जोर शोर से हाई कोर्ट के उस ऑर्डर का पालन कर रहे है, जिसके अनुसार मोटर दुपहिया वाहन पर पिछली सवारी को भी हेलमेट लगाना होगा।
मगर जैसा कि फोटो में दिख रहा है कि हरिद्वार के ही विभिन्न क्षेत्रो में प्रति दिन 15-20 पुलिस विभाग के वो कर्मचारी और अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का खुला उलंघन करते मिल ही जाते है। जो साबित करता है कि स्टाफ होने के कारण उनका चालान तो कटेगा नही न ही कोई विभागीय कार्यवाही होगी इसलिए काहे को सर पर डब्बा रखे? मगर इसी साल कप्तान साहब ने एक कांस्टेबल को इसलिए सस्पेंड कर दिया था कि उसने हेलमेट को पहनने की अपेक्षा बाइक पर पीछे टांग कर बाइक चला रहा था। फोटो वायरल होने पर कप्तान साहब ने उसे सस्पेंड कर दिया था। उस सस्पेंड से कुछ महीने 98% पुलिस वालों के सर पर हेलमेट आ गए थे। मगर अब वो बात पुरानी हो गयी, पुलिस के आला अधिकारी भी अन्ये कार्य मे व्यस्त हो गये। मगर जनता के बीच ऐसे गैर जिम्मेदार पुलिस कर्मी जिन्हें न तो अपनी जान की परवाह है न ही किसी विभागीय कार्यवाही की, ऐसे अनुशासनहीन पुलिस वालों पर यदि बड़े अधिकारी , सीपीयू वाले सख्त कार्यवाही नही करते तो इससे समाज मे एक बहुत ही गलत संदेश जाता है। जिससे ओमकांत भूषण, शिव प्रसाद डबराल, आशुतोष चौहान और हितेश कुमार जैसे पुलिस अधिकारियों को चालान काटते समय बहस का सामना करना पड़ता जो धूप में खड़े होकर अपने फर्ज को अंजाम देते है।
(गगन शर्मा) हरिद्वार। 16 अगस्त से लेकर अब तक सीपीयू और पुलिस जोर शोर से हाई कोर्ट के उस ऑर्डर का पालन कर रहे है, जिसके अनुसार मोटर दुपहिया वाहन पर पिछली सवारी को भी हेलमेट लगाना होगा।
मगर जैसा कि फोटो में दिख रहा है कि हरिद्वार के ही विभिन्न क्षेत्रो में प्रति दिन 15-20 पुलिस विभाग के वो कर्मचारी और अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का खुला उलंघन करते मिल ही जाते है। जो साबित करता है कि स्टाफ होने के कारण उनका चालान तो कटेगा नही न ही कोई विभागीय कार्यवाही होगी इसलिए काहे को सर पर डब्बा रखे? मगर इसी साल कप्तान साहब ने एक कांस्टेबल को इसलिए सस्पेंड कर दिया था कि उसने हेलमेट को पहनने की अपेक्षा बाइक पर पीछे टांग कर बाइक चला रहा था। फोटो वायरल होने पर कप्तान साहब ने उसे सस्पेंड कर दिया था। उस सस्पेंड से कुछ महीने 98% पुलिस वालों के सर पर हेलमेट आ गए थे। मगर अब वो बात पुरानी हो गयी, पुलिस के आला अधिकारी भी अन्ये कार्य मे व्यस्त हो गये। मगर जनता के बीच ऐसे गैर जिम्मेदार पुलिस कर्मी जिन्हें न तो अपनी जान की परवाह है न ही किसी विभागीय कार्यवाही की, ऐसे अनुशासनहीन पुलिस वालों पर यदि बड़े अधिकारी , सीपीयू वाले सख्त कार्यवाही नही करते तो इससे समाज मे एक बहुत ही गलत संदेश जाता है। जिससे ओमकांत भूषण, शिव प्रसाद डबराल, आशुतोष चौहान और हितेश कुमार जैसे पुलिस अधिकारियों को चालान काटते समय बहस का सामना करना पड़ता जो धूप में खड़े होकर अपने फर्ज को अंजाम देते है।



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