ऊर्जा प्रदेश का तमगा तो उत्तराखंड को बहुत दिन पहले मिल गया था लेकिन ऊर्जा उत्पादन के बजाय इस राज्य में अधिकारी लू़ट में जुटे हुए हैं. जो सब्सिडी जनता को दी जानी थी उस पैसे से विभाग के अधिकारियों ने अपनी जेबें गर्म कर लीं. लूट-खसोट में कोई कमी न रह जाए इसलिए अधिकारियों ने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी करोड़ों की बंदरबाट में साझेदार बनाया.
उत्तराखंड की रिन्यूवल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी यानि उरेडा के पास जिम्मेदारी थी उत्तराखंड को जगमग करने की लेकिन राज्य को अंधकार में डालकर घर चमके उरेडा के अधिकारियों के, उनके दोस्तों के और रिश्तेदारों के. दरअसल उरेडा ने एक दिन में करोड़ों रुपये का सोलर प्लांट खड़ा कर दिया और एक ही दिन में करोड़ों रुपये की बंदरबांट भी कर दी.
उरेडा के अधिकारी पैसा कमाने के लिए कितनी तेजी और काबिलियत केस साथ काम करते हैं, यह इस तरह समझिए...
28 से 30 मार्च 2016 को उरेडा की तरफ से सोलर प्लांट प्रोजेक्ट का आंवटन हुआ.
और 31 मार्च यानि दूसरे ही दिन करीब 7 सोलर प्लांट बनकर तैयार हो गए और इन्होंने ऊर्जा उत्पादन भी शुरू कर दिया.
प्रोजेक्ट की शर्त यह थी कि प्लांट घर की छत या बंजर जमीन पर लगने थे लेकिन यहां कृषि भूमि पर ही प्लांट लगा दिए गए
पूरे राज्य में सोलर प्लांट के कुल 93 प्रोजेक्ट लगने थे जो आम जनता को दिए जाने थे लेकिन अधिकारियों ने उन्हें अपने चहेतों को दे दिया.
प्रोजेक्ट पर 70 फीसदी की सब्सिडी यानि छूट भी मिलनी थी. इसे या तो अधिकारी डकार गए या चहेतों ने कमा ली.
इस मामले में उरेडा के अफसर भी चुप हैं और उनके चहेते भी. लेकिन जिन्होंने ईमानदारी से काम किया, वह रो रहे हैं क्योंकि उन्हें कोई सब्सिडी नहीं मिली.
उरेडा में सोलर प्लांट के नाम पर जो बंदरबांट कर करीब 70 से 80 करोड़ रुपये का खेल किया गया. इस पर प्रदेश की ऊर्जा सचिव राधिका झा का कहना है कि इस मामले में वह राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार से भी बात करेंगी.



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