हरिद्वार की गूंज (24*7)

(अमित नेगी) श्रीनगर। कोविड-19 कोरोना कॉल महामारी में जिस तरह फ्रंटलाइन वर्कर एवं समस्त अधिकारी जनहित में अपना घर परिवार को छोड़कर अपना पूर्ण समय आम जनमानस को बचाने में लगे हुए हैं तथा सरकार के साथ पूर्ण भागीदारी निभाते हुए अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे है। वहीं प्रदेश सरकार अधिकारी कर्मचारियों  का 1 दिन का वेतन कटौती के आदेश निर्गत कर चुकी है इस आपदा की घड़ी में प्रदेश के समस्त अधिकारी कर्मचारी 1 दिन का वेतन तो क्या उनसे जो हो पड़ेगा वह करने को तैयार है, लेकिन वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा माननीय मंत्रियों विधायकों के वेतन की कटौती तथा उनके द्वारा जनहित में विधायक निधि तथा सांसद निधि से धनराशि उपलब्ध कराने हेतु किसी तरह का आदेश निर्गत नहीं कर पा रही है, यह एक शर्मनाक बात है जहां कोविड-19 के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग में लगे हुए अल्प भोगी कार्मिक 7000 से लेकर 15000 तक की धनराशि में अपनी जान जोखिम में डालते हुए लगातार 24 घंटे कार्य कर रहे हैं वही मंत्री, विधायक इसदुख की घड़ी में अपने प्रचार प्रसार तथा अपने कार्यों से इत्र हैं महामारी के चलते हुए जिस तरह कोविड-19 के अंतर्गत संविदा तथा प्रतिदिन की हिसाब से अल्प धन राशि में जो कार्मिक रात दिन कार्य कर रहे हैं, सरकार को चाहिए कि वह उन योद्धाओं को प्रोत्साहन के रूप में उन्हीं पदों पर स्थाई रूप का दर्जा देते हुए उनका मनोबल तथा उनके सच्चे कार्य के प्रति कार्य करने का इनाम उन्हीं पदों पर स्थाई नियुक्ति देते हुए सकारात्मक कार्यवाही करें, साथ ही साथ कोविड-19 महामारी के दौरान संपूर्ण प्रदेश में कार्य कर रहे अधिकारी, कर्मचारी विशेषत, स्वास्थ्य विभाग व पुलिस विभाग के कार्य को जिनके द्वारा यह सराहनीय कार्य किया जा रहा है उन को प्रोत्साहन के रूप में उनका 1 दिन का वेतन को न काटते हुए उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि वह यूं ही अपने तथा अपने परिवार की फिक्र को दूर रखते हुए जनहित में इस महामारी में अच्छे से अच्छा कार्य कर सके, साथ ही साथ संपूर्ण देशवासियों से अपील की वे कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए स्वयं एवं अपने परिवार सहित स्वस्थ रहे।

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