हरिद्वार की गूंज (24*7)

(यतेंद्र कुमार) हरिद्वार। जूना अखाड़े की प्राचीन पवित्र छड़ी यात्रा रविवार तड़के जोशीमठ से श्रीमहंत प्रेमगिरि महाराज के नेतृत्व में भविष्य बद्री के दर्शनों के लिए रवाना हुयी। अत्यंत दुर्गम मार्ग वाले पौराणिक तीर्थ भविष्य बद्री धौली गंगा के किनारे छह किलोंमीटर की खड़ी चढाई पर करके पहुचा जा सकता है। इस कठिन चढाई को पार करके महंत महादेवानंद गिरि,महंत परमानंद गिरि,महंत पारसपुरी तथा विद्यानंद पुरी पवित्र छड़ी के साथ भविष्य बद्री मन्दिर पहुचे, वहा विद्वान ब्राहणों द्वारा पवित्र छड़ी की पूजा अर्चना की गयी तथा भविष्य बद्री के दर्शन कराए गए। श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग के प्रारम्भ में जोशीमठ  नृसिंह भगवान की मूर्ति का हाथ गिर जाएगा। तथा विष्णु प्रयाग के पास पतमिला में जय और विजय पहाड़ गिर जायेंगे,जिसके चलते बद्रीनाथ धाम जाने का मार्ग अवरूद्व हो जायेगा। तब बद्रीनाथ भगवान भविष्य बद्री में बिराजमान होंगे। और यहां पर उनकी पूजा अर्चना होगी। उनके अनुसार भविष्य बद्री धाम में एक शिला पर धीरे-धीरे भगवान के स्वरूप की आकृति उभर रही है। देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित इस शिला पर बद्रीश पंचायत के देवतओं की आकृति भी उभर रही है। उन्होने कहा भविष्य में भविष्य बद्री ही भगवान बद्रीनाथ के धाम के रूप में पूजे जाएंगे। भविष्य बद्री के दर्शनों के पश्चात प्राचीन पवित्र छड़ी साधुओं की अच्छी संख्या के साथ छड़ी महंत पुष्करराज गिरि, श्री विशम्भर भारती, श्रीमहंत शिवदत्त गिरि, महंत रूद्रानंद सरस्वती, महंत अजयपुरी,महंत भगत गिरि, महंत शातांनद गिरि, महंत गुप्तगिरि,महंत कमल भारती, महंत केदार भारती आदि के नेतृत्व में रात्रि विश्राम के लिए बद्रीनाथ धाम पहुची।

Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours