हरिद्वार की गूंज (24*7)
डॉ० शिवकुमार चौहान असिस्टेंट प्रोफेसर, गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
(रजत चौहान) हरिद्वार। मानव की शारीरिक रचना इस प्रकार से बनी हुई है जिसमे किसी भी तत्व की क्षण भर की कमी अथवा अधिकता उसके कार्य में अवरोध पैदा करती है जिसके फलस्वरूप आदि भौतिक अथवा मानसिक व्याधिया उत्पन्न होती है, मानसिक तनाव उनमें से उत्पन्न एक व्याधि है। जो व्यक्ति के शरीर द्वारा मानवता के लक्ष्य प्राप्ति मे रूकावट बनती है, जो आगे चलकर व्यक्ति के अस्तित्व पर ही संकट पैदा कर देती है। व्यक्ति के शरीर को स्फूर्ति एवं ऊर्जावान रखने के लिए सभी अंग तथा शरीर के सभी सिस्टमों का भली प्रकार काम करना आवश्यक है। इन सभी सिस्टम को काम करने के लिए मिलने वाली ऊर्जा का केन्द्र भोजन तथा उसकी प्राप्ति का माध्यम रक्त है। रक्त इस ऊर्जा के घटकों को अपने अंदर घुलनशील अवस्था मे रखते हुए शरीर के सभी अंगों को पहंुचाने का काम करता है। जिससे सभी अंग भली प्रकार से कार्य कर सके। इसी प्रकार यह रक्त शरीर का रिमोट एरिया कहलाने वाले मस्तिष्क को रक्त के माध्यम से आक्सीजन की सप्लाई करता है। जिससे मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र के सहयोग से संदेशो का आदान-प्रदान करता है अर्थात किस अंग को कब कहा और कितनी ऊर्जा की आवश्यकता है मस्तिष्क द्वारा निर्धारित होती एवं सप्लाई की जाती है। किसी व्यक्ति में मानसिक तनाव के उत्पन्न होने का कारण आक्सीजन की मात्रा मे कमी अथवा आपूर्ति में देरी मुख्य है। इस मानसिक तनाव के कारण व्यक्ति अपना सरल से सरलतम कार्य भी नही कर पाता है, क्योकि विचारो में नकारात्मक एवं सकारात्मक का समावेश होने के कारण उसके मस्तिष्क में एक उलझन सी बनी रहती है। इस उलझन से व्यक्ति शीघ्र बाहर निकलने का मार्ग ढंढता है, क्योकि यह उलझन उसके संन्तुलन को प्रभावित कर रही होती है। यह ऐसी ही स्थिति होती है जिस प्रकार एक संकरे मार्ग को पार करने के लिए व्यक्ति अपने दोनो हाथों को फैलाते हुए संतुलन बनाने का प्रयास करता है। क्योकि बिना संतुलन बनाये रास्ता पार करना उसके लिए संभव नही होता। ऐसी ही स्थिति इस समय मानसिक तनाव से ग्रस्त होने के कारण प्रभावित व्यक्ति की होती है, इसलिए सार रूप मे कहा जा सकता है कि आक्सीजन की कमी के कारण उत्पन्न मानसिक तनाव दूर करने के लिए जीवन मे संतुलित रहना आवश्यक है। जिसको प्राप्त करने के लिए आत्म निर्भर बनने का प्रयास करना होगा।यह आत्म निर्भरता ही नकारात्मक और सकारात्मक विचारों के बीच सेतु का काम करती है।



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