हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। मेरे प्यारों लॉकडाउन में अगर कोई अच्छा काम नहीं कर सकते तो बुरा भी ना करो अभी जवानी है, इसलिए जवानी के नशे में चूर होकर ऐसी हरकते बिल्कुल भी मत करो जवानी को अच्छे कामों में खर्च करो अगर बुरे कामों में खर्च करोगे तो अल्लाह तआला के यहाँ इन तमाम चीज़ो का हिसाब देना होगा आज कल मोबाइल और इंटरनेट का ज़माना है, नौजवान लड़के और लड़कियाँ जिस तरह फ़िल्मी दुनिया में हीरो और हिरोइन को करते हुए देखते है, उसी तरह करने में इन्हे मज़ा आता है, हालांकि इन्हे सोचना चाहिए कि यह काम जो हम कर रहे है, इस से हमारा अल्लाह नाराज़ होता है, और हमें अल्लाह को ख़ुश रखना चाहिए ना कि नाराज़ मेरे प्यारे इस से तुम्हारी बदनामी तो होगी ही' तुम्हारी बदनामी के साथ साथ तुम्हारे माता पिता की भी बदनामगी भी होगी लेहाज़ा ख़ुदा के वास्ते इन बुरी हरकतों से बाज़ आजाओ अगर तुम चाहते हो कि लॉकडाउन में हमारा टाइम पास होजाए और बोर होने से बच जाएँ तो कोई ऐसा काम करो जिस से तुम्हारे माता पिता को भी ख़ुशी हो और जनता को भी ख़ुशी हो और अल्लाह तआला भी तुमसे राज़ी हो जाए, मिसाल के तौर पर अगर कोई दीन की बात नहीं जानते हो तो अपने दोस्तों और साथियों से सीख लो अगर तुम्हारा साथी नहीं जानता है, तो उसे भी सिखा दो अगर आप लोगों में से कोई पढ़ना लिखना नहीं जानता है, तो जो तुम में से पढ़ा लिखा है, वह उस बन्दे को पढ़ना लिखना सिखा दे, इससे आप लोगों का बहुत ज़्यादा फ़ायदा होगा और तुम्हारा वक़्त और टाइम भी पास हो जाएगा, मेरे प्यारों हदीसे पाक में आता है, बुखारी शरीफ़ की हदीस है कि जिसका अर्थ यह है, दो नेमतें ऐसी हैं जिसकी तरफ़ से लोग ग़फ़लत में पड़े हुए है, पहली सेहत की नेमत सेहत की नेमत ऐसी नेमत है कि अगर किसी की सेहत व तन्दुरुस्ती अच्छी ना हो तो वह कोई काम नहीं कर सकता ना तो दुनिया का काम कर सकता है, और ना ही आख़िरत का इसलिए मेरे प्यारों सेहत की नेमत को अच्छे कामों में ख़र्च करो ना कि बुरे कामों में यानी गाने बजाने और क़व्वाली वग़ैरा पर ख़र्च ना करो दूसरी नेमत जो इंसान के पास है, वह है ख़ाली टाइम' ख़ाली समय जो इंसान के पास है, उसको भी बर्बाद और ख़राब नहीं करना चाहिए बल्कि उसे अच्छे कामों में सर्फ़ करना चाहिए मिसाल के तौर पर अगर हम घर पर हैं, तो हमें अपने बच्चो को कोई दीन की बात सिखाना चाहिए या कोई दुनिया की बात जिससे आगे चल कर बच्चे को फ़ायदा हो' और अगर आप के माता पिता ज़िंदा हों तो उनकी ख़िदमत करनी चाहिए इसके अलावा अगर क़ुरआन शरीफ़ पढ़े हुए हैं, तो क़ुरआन वग़ैरा की तिलावत करनी चाहिए इसके अलावा अगर कोई और किताब पढ़ना चाहें तो उसे भी पढ़ें लेकिन अपने वक़्त को इन बेहूदा और ग़लत चीज़ों में बिल्कुल भी बर्बाद ना करें क्योंकि वक़्त और सेहत बहुत क़ीमती दौलत है, अगर आपने इसे यूँही बर्बाद करदिया तो बाद में अफ़सोस करना पड़ेगा और बाद में अफ़सोस करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा, अल्लाह तआला मुझे भी और आप लोगों को भी अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए मुहम्मद सलीम क़ासमी सहायक अध्यापक मदरसा दारूल उलूम असअदिया ईक्कड खुर्द जनपद हरिद्वार।



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