हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। मंदी की मार कहो या आज के समय शिक्षण संस्थान चलाने हेतु आवश्यक हो जाता हैं कि समय के अनुसार इंस्टीट्यूट में आय के साधन बढाये जाय। उसके लिये चाहिए कि कंप्यूटर कोर्स के साथ-साथ किसी विश्वसनीय यूनिवर्सिटी के साथ डिस्टेंस मोड पर कार्य किया जाय। प्रत्येक प्रोफेशनल इंसान चाहता हैं कि उसकी जॉब में उसे उचित समय पर पदोन्नति और वेतन बढ़ोत्तरी हो, प्राइवेट जॉब में कई बार देखा जाता है कि अच्छा खासा अनुभव होने या अच्छी मेहनत, लग्न औऱ ईमानदारी से काम करने के बावजूद वेतन नही बढ़ता या पदोन्नति नही होती तो उसका कारण होता हैं कि समय रहते हुए हम अपनी जॉब के अनुसार अपनी शिक्षा डिग्री, डिप्लोमा को अपडेट करने से चूक जाते हैं। इसके पीछे जो बहुत बड़ी वजह होती हैं वह हैं जीवन मे समय का अभाव और परिवार की आवश्यकताओं का हमारे जीवन पर हावी होना। वर्तमान में जब देश की जनसंख्या असीमित और देश के संसाधन सीमित मात्रा में है तो देश के युवाओ को चाहिए कि वो समय की कीमत को समझे। जैसे कि काफ़ी युवक युवती रेगुलर कॉलेज में एडमिशन के बावजूद छोटि मोटी पार्ट टाइम जॉब करते है, डिस्टेंस एजुकेशन: छोटे कदम लम्बी छलांग समय के अभाव या परिवार की जरूरतों को पूरा करने के चक्कर मे जिन युवाओ की पढ़ाई पूरी नही हो सकी वो उसे डिस्टेंस मोड से भी पूरी कर सकते है। उदाहरण के लिये एक बैंक में प्राइवेट जॉब करने वाली पूजा ने जॉब के साथ साथ वंशिका इंस्टिट्यूट के माध्यम से सुभारती यूनिवर्सिटी मेरठ से एमबीए करके न सिर्फ वेतन में बढोत्तरी पाई साथ ही उसके मैनेजर ने उसे कलर्क से असिस्टेंट मैनेजर बना दिया। इसी प्रकार समाज मे ऐसे बहुत से युवा हैं जो अपनी जॉब से इसलिए सन्तुष्ट नही है क्योंकि उनकी कम्पनी वाले उनके परिश्रम और प्रतिभा के अनुसार सेवा तो ले रहे है मगर उनका पद औऱ वेतन पर्याप्त नही है। ऐसे युवको को चाहिए कि वो बिना समय गवाए किसी विश्वनीय शिक्षण संस्थान के माध्यम से सुभारती जैसी किसी विश्वनीय यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा पूरी करे। ऐसे में यदि कोई शिक्षण संस्थान डिस्टेंस मोड पर यूनिवर्सिटी का सेंटर लेकर कार्य करते हैं तो सर्वप्रथम उसकी आय के साधन बढ़ जाते है फिर उसकी आय कंप्यूटर कोर्स तक सीमित नही रह जाती हैं। कंप्यूटर कोर्स के छात्र 3 या 6 महीने बाद अपना कोर्स पूर्ण करके निकल जाते है उसके बाद फिर से नए एडमिशन पर उर्जा बर्बाद करो। जबकि स्नातक या परास्नातक एडमिशन में छात्र 3 या कम से कम 2 साल फीस देता है। अर्थात पहले वर्ष यदि आपके संस्थान में 20 छात्र है तो अगले वर्ष 50 छात्र हो जाते है ये संख्या साल दर साल बढ़ती ही है बेशर्ते आप छात्रों को सर्विस अच्छी दो। छात्र चाहे कंप्यूटर का हो या यूनिवर्सिटी से सभी को सुविधा चाहिए उसके पास कंप्यूटर कोर्स या यूनिवर्सिटी डिग्री करने के बहुत से विकल्प होते है लेकिंन यदि आपके शिक्षण संस्थान में धन का अभाव नही है पैसे आने के स्रोत एक से ज्यादा हैं तो आप अपने छात्रों को बैग ए सी आदि की सुविधा भी दे सकते हो। शहर कोई भी हो यदि उसमे 3 सेंटर नए खुल रहे हैं तो 2 ऐसे सेंटर बन्द भी होते देखे जाते है जिनके पास आय के साधन सीमित थे। तभी तो कहते हैं कि सफलता किसी भी क्षेत्र में हो उसके लिये समय और अवसरों की कद्र करना बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता हैं।



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