हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। सिडकुल फैक्ट्रीयो मेें श्रमिकों का शोषण रुकने का नाम नहीं ले रहा है, लगातार श्रीमिको का फैक्ट्री मालिकों द्वारा शोषण किया जा रहा है वही अपनी मांगों के लिए श्रमिक भी धरना प्रदर्शन तो कभी आलाधिकारियों को ज्ञापन प्रेरित करते हैं, लेकिन शासन प्रशासन श्रमिकों की मांगो पर गंभीर नहीं है, सरकार की अनदेखी श्रमिकों पर भारी पड़ रही है, जहां केंद्र सरकार श्रमिकों की सुविधाओं के लिए नई-नई योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही है, वही श्रमिकों को अपनी रोजी रोटी के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है इसी क्रम में ताजा मामला सिडकुल में स्थित शौर्य हेल्थ केयर फैक्ट्री का सामने आया है जहां बिना सूचना और सैलरी दिए फैक्ट्री मालिक ने श्रमिकों को फैक्ट्री से बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिससे हताश होकर श्रमिकों ने फैक्ट्री परिसर में ही जबरदस्त धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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कई घंटे के धरनेेे प्रदर्शन के बाद फैक्ट्री मालिक ने श्रमिकों को सैलरी के रुप में चेक वितरित किए, वही महिला श्रमिक अनुराधा चौहान, सुधा मित्तल, सुनीता, रोहिणी, नीलम, अनुराधा, उषा, नीलू, रूपा, निर्मला, सावित्री, खुशबू आदि का कहना है कि फैक्ट्री मालिक ने बिना बताएं सभी श्रमिकों को अचानक फैक्ट्री से निकाल दिया है और हमें सैलरी भी नहीं दी जा रही थी जिससे सभी श्रमिकों को धरना प्रदर्शन शुरू करना पड़ा, जब जाकर फैक्ट्री मालिक ने चेक दिए हैं उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों का दो साल का पीएफ भी नहीं दिया गया है और लगातार फैक्ट्री मालिक द्वारा श्रमिकों की सैलरी से पीएफ काटा जा रहा था लेकिन फैक्ट्री मालिक ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए श्रमिकों का काटा हुआ पीएफ भी गबन कर लिया है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री मालिक के आदेश पर श्रमिकों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई है सुबह के समय फैक्ट्री गेट को खोला नहीं जा रहा था गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने फैक्ट्री मालिक के आदेश पर श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार किया है उन्होंने बताया कि अचानक फैक्ट्री से निकाल दिए जाने के बाद रोजी रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है जो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहींं किया, उन्होंने कहा कि पीएफ और फैक्ट्री से अचानक निकालने के संबंध में जल्द ही आलाधिकारियों से भेंट की जाएगी। और इंसाफ के लिए गुहार लगाई जाएगी। आपको बता दे कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लेवर इंस्पेक्टर शौर्य हेल्थ केयर फैक्ट्री में ही मौजूद थे और मामले को रफा दफा करने में अपनी भूमिका महत्वपूर्ण तरीके से निभा रहे थे श्रमिकों पर लगातार फैसले का दबाव बनाया जा रहा था यह विडंबना ही है कि उधोग की रिड कहे जाने वाले श्रमिको को खुन के आंंसु रोने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। प्रशासन में बैठे अधिकारी भी फैक्ट्री मालिको से मिलीभगत कर श्रमिको का शोषण करने में उतारू है जहां सरकार श्रमिकों के हितों में कार्य करने का दावा करती है वही प्रशासन में बैठे भ्रष्ट अधिकारी श्रमिको के हाथों से रोजी रोटी छीनने का काम कर रहे हैं सरकार को चाहिए कि बिन नोटिस दिए श्रमिको को निकालने वाली फैक्ट्री की अपने स्तर से जांच कराएं और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए, इतना ही नहीं विभागीय अधिकारियों की भी जांच की जाए, जो नियमों की धज्जियां उड़ा कर और अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर न होकर फैक्ट्री मालिकों के हितों की रक्षा करने में लगे रहते हैं।



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