हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। शिवालिक नगर रामधाम कालौनी में वीर अमित जी ने अपने परिवार के साथ संत जी के सानिध्य में महर्षि बाल्मीकि जी का विधि विधान के साथ पूजन कर गृह प्रवेश कार्य का संम्पादन कराया जिसमें भारी संख्या में लोग उपस्थिति रहे, पूजन कार्यक्रम के पश्चात आदि धर्म प्रचारक अरूण देत्य आदिवंशी जी ने कहा कि महर्षि बाल्मीकि जी के तप से उन्हे ग्यान की प्राप्ति हुई थी तप से बढ़कर कुछ भी नहीं है तप से ही बृम्हा श्रृष्टि की रचना करता है तप से ही शंकर संहार करते हैं तप से ही विष्णु पालन करते हैं तप का अर्थ है अपनी महात्वाकाक्छाओं पर अंकुश लगाना इच्छाओं का दमन करना बुरी आदतों का त्याग करना महर्षियों के बताये मार्ग का अनुसरण करना आदि, हम सभी को सदैव बड़ो का सम्मान व रिषियों का पूजन करना चाहिए।
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। शिवालिक नगर रामधाम कालौनी में वीर अमित जी ने अपने परिवार के साथ संत जी के सानिध्य में महर्षि बाल्मीकि जी का विधि विधान के साथ पूजन कर गृह प्रवेश कार्य का संम्पादन कराया जिसमें भारी संख्या में लोग उपस्थिति रहे, पूजन कार्यक्रम के पश्चात आदि धर्म प्रचारक अरूण देत्य आदिवंशी जी ने कहा कि महर्षि बाल्मीकि जी के तप से उन्हे ग्यान की प्राप्ति हुई थी तप से बढ़कर कुछ भी नहीं है तप से ही बृम्हा श्रृष्टि की रचना करता है तप से ही शंकर संहार करते हैं तप से ही विष्णु पालन करते हैं तप का अर्थ है अपनी महात्वाकाक्छाओं पर अंकुश लगाना इच्छाओं का दमन करना बुरी आदतों का त्याग करना महर्षियों के बताये मार्ग का अनुसरण करना आदि, हम सभी को सदैव बड़ो का सम्मान व रिषियों का पूजन करना चाहिए।



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